कंगारू मदर केयर के बारे में बताते चिकित्सक।
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय कंगारू मदर केयर (केएमसी) दिवस पर शुक्रवार को वीरांगना अवंतीबाई जिला महिला अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इसका उद्देश्य कम वजन के साथ और समय पूर्व जन्मे शिशुओं की वैज्ञानिक एवं प्रभावी देखभाल पद्धति केएमसी के प्रति आमजन को जागरूक करना था।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति मल्होत्रा ने बताया कि अस्पताल में नौ बेड का केएमसी वार्ड है। यहां 2.5 किलोग्राम से कम वजन वाले नवजातों को विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों की निगरानी में केएमसी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2025-26 में यहां 981 नवजात भर्ती किए गए थे, जिनमें 460 बालक और 521 बालिकाएं थीं। केएमसी से नवजात को आवश्यक गर्माहट मिलती है, स्तनपान बेहतर होता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान ने बताया कि केएमसी पद्धति में नवजात को मां, पिता अथवा अन्य देखभालकर्ता के सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखा जाता है। एक बार में कम से कम दो घंटे तक केएमसी देना चाहिए और इसे रात में भी जारी रखना चाहिए। उन्होंने केएमसी को सफल बनाने में प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के दौरान लाभार्थी रेखा ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी बच्ची का जन्म गर्भावस्था के सातवें माह में हुआ था। शिशु का वजन केवल 1,100 ग्राम था। चिकित्सकों व स्टाफ नर्सों के मार्गदर्शन में नियमित केएमसी से बच्ची का वजन बढ़कर 1500 ग्राम हो गया है। डॉ. सलमान खान ने बताया कि बच्चों को तब तक विशेष निगरानी में रखा जाता है, जब तक उनका वजन 2500 ग्राम नहीं हो जाता।
कंगारू मदर केयर के बारे में बताते चिकित्सक।