कैराना लोकसभा सीट पर 16 लाख से ज्यादा वोटरों में सर्वाधिक तादाद मुस्लिम की है। दूसरा नंबर अनुसूचित जाति का है। ये दोनों वोट मिलकर लगभग 45 फीसदी के आसपास बैठते हैं। जाट वोट 10 फीसदी हैं। इसके बाद गुर्जर, कश्यप व सैनी मतदाता हैं। इनकी तादाद एक से सवा लाख के बीच है। विपक्षी दलों की नजर मुस्लिम, दलित व पिछड़े वर्ग के वोटों पर है। भाजपा से दिवंगत सांसद हुकम सिंह की बेटी मृगांका सिंह का चुनाव लड़ना लगभग तय है। वह गुर्जर समाज से हैं।
भाजपा के वोटों के ध्रुवीकरण के प्रयासों को नाकाम करने के लिए विपक्षी दल जाट या किसी अन्य पिछड़े वर्ग के नेता को चुनाव लड़ा सकते हैं। यूं तो प्रत्याशी मुस्लिम भी हो सकता है लेकिन ध्रुवीकरण से बचने के लिए गठबंधन से किसी जाट को टिकट मिल सकता है। उनके वोट चुनाव में निर्णायक साबित हो सकते हैं। गठबंधन में सपा चुनाव लड़ी तो भी इसी समीकरण को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि नूरपुर विधानसभा सीट को लेकर स्थिति लगभग साफ है। वहां सपा चुनाव लड़ेगी। 2017 के चुनाव में भी सपा यहां दूसरे नंबर पर रही थी।
कांग्रेस ने साधा सपा पर निशाना
कैराना उपचुनाव को लेकर गठबंधन का स्वरूप तय नहीं है, फिर भी एक सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस इसका हिस्सा होगी। गोरखपुर और फूलपुर में कांग्रेस ने अलग चुनाव लड़ा था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इमरान मसूद ने कैराना सीट पर इकतरफा दावेदारी के लिए सपा को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने रालोद को चुनाव लड़ाने की पैरोकारी की है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
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पश्चिमी यूपी में एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के परिणाम भाजपा के मिशन 2019 के साथ सपा-बसपा (विपक्षी) गठबंधन के भविष्य की तस्वीर बताएंगे।
गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद कैराना व नूरपुर उपचुनाव योगी सरकार और भाजपा के लिए साख का सवाल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार के मंत्री और संगठन के कार्यकर्ता दोनों सीटें जीतकर सपा-बसपा गठबंधन का असर समाप्त करने के उद्देश्य से चुनाव मैदान में उतरेंगे। यदि भाजपा दोनों सीटों पर कब्जा बरकरार रखने में सफल होती है तो प्रदेश में एक बार फिर भाजपा कार्यकर्ताओं को खुशी मनाने का मौका मिलेगा। विपक्षी गठबंधन भी कैराना व नूरपुर सीटें भाजपा से छीनने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेगा।
गठबंधन में कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है। यदि विपक्षी गठबंधन की जीत का सिलसिला जारी रहता है तो लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सपा-बसपा न केवल मजबूत होगी बल्कि दूसरे क्षेत्रीय दल भी गठबंधन में शामिल होंगे।
हुकुम की बेटी, लोकेंद्र की पत्नी होंगी उम्मीदवार!
भाजपा कैराना से पूर्व सांसद स्व. हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह और नूरपुर से पूर्व विधायक दिवंगत लोकेंद्र सिंह की पत्नी अवनी सिंह को उम्मीदवार बना सकती है। भाजपा काफी दिनों से चुनावी तैयारी में जुटी है।