जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत नियम न बनाने पर हाईकोर्ट के सख्त रवैये के बाद भी अभी तक इन्हें अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया है कि नियम तैयार कर लिए गए हैं। लोकसभा चुनाव के बाद कैबिनेट की बैठक में इन्हें मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 29 मई नियत की है। राज्य की विशेष सचिव शकुंतला ने अदालत को बताया कि विधायी विभाग ने नियम तैयार किए हैं। इनमें कुछ सुधार किए जाने हैं।
सुधार के बाद इन्हें पहले भाषा विभाग और फिर वहां से कार्मिक व वित्त विभाग को भेजा जाएगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर इन्हें प्रकाशित किया जाएगा।
अदालत के सवाल का जवाब नहीं दे सके अधिकारी
सुनवाई के दौरान जिला जांच समिति ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश की। अदालत केपूछने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने स्वीकार किया कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने कुछ संरक्षण गृहों में पाया कि बच्चों के साथ अधिक उम्र केलोग भी रह रहे हैं।
हालांकि संरक्षण गृहों के संचालकों का कहना था कि अधिक उम्र वालों को उनकी मानसिक उम्र के लिहाज से वहां रहने दिया जा रहा है। इस पर अदालत ने पूछा कि रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख क्यों नहीं है तो जिला प्रोबेशन अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके।
बाल कल्याण समिंति की सदस्य सुधा रानी भी इसका संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। उप जिला प्रोबेशन अधिकारी भी नहीं बता सके कि कितने संरक्षण गृहों में अधिक उम्र केलोग रह रहे हैं।
अदालत ने कहा, सिर्फ जुबानी सेवा और कागजी कवायद हो रही
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस मामले में सिर्फ जुबानी सेवा और कागजी कवायद हो रही है। इसके लिए दोषी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
संरक्षण गृहों में सीसीटीवी कैमरों का सर्वे कराने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गैरसरकारी संस्थाओं की ओर से चलाए जा रहे सभी 134 संरक्षण गृहों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि राज्य पुलिस की अभिसूचना शाखा यह सर्वे करके 2 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करे। पुलिस महानिदेशक इसके लिए किसी जिम्मेदार अधिकारी को नामित करें।