हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश रंगनाथ पांडेय गुरुवार को सेवानिवृत्त हो गए। पर उनके सेवानिवृत्त होने पर पूर्व में तय पूर्ण पीठ विदाई समारोह को रद्द कर दिया गया। माना जा रहा है कि ऐसा न्यायमूर्ति पांडेय द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर जजों की नियुक्ति पर सवाल उठाए जाने के बाद उत्पन्न विवाद के चलते किया गया।
हालांकि, समारोह रद्द करने के लिए जो आदेश जारी हुआ उसमें अप्रत्याशित परिस्थितियों की वजह से ऐसा करना दर्शाया गया है। जस्टिस पांडेय के रिटायर होने के मौके पर पूर्ण विदाई समारोह आयोजित किए जाने के आदेश एक जुलाई को दिए गए थे। इसी दिन जस्टिस पांडेय ने प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा था। हाईकोर्ट के वरिष्ठ रजिस्ट्रार मानवेंद्र सिंह ने गुरुवार को इस समारोह को रद्द किए जाने के आदेश जारी कर दिए।
प्रधानमंत्री को भेजे गए जस्टिस पांडेय के पत्र को लेकर खासी चर्चा छिड़ी हुई है। इस पत्र में उन्होंने हाईकोर्ट में जजों की तैनाती में भाई-भतीजा व जातिवाद का आरोप लगाया है। उन्होंने अपने पत्र में कॉलेजियम के जरिए जजों की नियुक्ति का एकमात्र प्रचलित मानदंड भाई-भतीजा व जातिवाद बताया था।
दूसरी तरफ अवध बार एसोसिएशन के तत्वाधान में गुरुवार को न्यायमूर्ति पांडेय का विदाई समारोह आयोजित किया गया। बार के अध्यक्ष आनंद मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में अवध बार के सदस्यों ने उन्हें विदाई दी। इस मौक़े पर न्यायमूर्ति ने न्यायपालिका में पारदर्शिता पर जोर दिया।