इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन और सूचना क्रांति के युग में न्याय पाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। नवीनतम तकनीकें आई हैं। जज और वकील इसका उपयोग करें और इंसाफ देकर समाज की सेवा करें।
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए जस्टिस चंद्रचूड़ बृहस्पतिवार को यहां हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में फुल कोर्ट फेयरवेल रेफरेंस में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 2 जुलाई 1985 को पहली बार शुगर इंडस्ट्री से जुड़े केस में जूनियर वकील के रूप में लखनऊ आया था।
31 साल बाद यहां से चीफ जस्टिस के रूप में विदाई ले रहा हूं। इस बीच लखनऊ से गहराई से जुड़ गया हूं। मैं यहां की तहजीब और परंपराओं का कायल हूं। यहां हाईकोर्ट की बिल्डिंग का सपना पूरा हो गया है। इसमें भी अवध की संस्कृति और आधुनिकता का संगम है।
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'कई अधिवक्ता बेहद प्रतिभावान'
- फोटो : amar ujala
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, मैं हर महीने तीसरे सप्ताह यहां आता था। हर रोज 70-80 केस लगे होते थे। मुझे खुशी होती थी कि बड़ी संख्या में युवा वकील अपने केस मेंशन कराने के लिए आते थे। कई युवा अधिवक्ता बहुत प्रतिभावान हैं।
उन्हें प्रशिक्षित करना, उनका मार्गदर्शन करना बार एसोसिएशन की जिम्मेदारी है। वहीं, कई वरिष्ठ अधिवक्ता अपने पेशे में देश के उत्कृष्ट लोगों में हैं। उन्होंने कहा, मैंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में शक्तियों का केंद्रीयकरण नहीं किया। विश्वास का माहौल बनाया। हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी, चैंबर अलॉटमेंट कमेटी और सुरक्षा कमेटी में हमारे सहयोगी जजों ने कंधे से कंधे मिलाकर काम किया।
अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एचपी सिंह परिहार भी बिल्डिंग के निर्माण कार्यों के निरीक्षण में सहयोगी के रूप में तत्पर रहे। सरकारी वकीलों ने भी पूरा सहयोग किया। समारोह में हाईकोर्ट के न्यायाधीश और अवध बार एसोसिएशन के सदस्य भी मौजूद थे।
लंच पर मीटिंग का अनुभव अच्छा
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मैंने ‘मीटिंग एट लंच’ शुरू की। इसका अच्छा अनुभव रहा। लंच के समय सहयोगियों से बातचीत के दौरान निजी समस्याओं पर भी चर्चा हो जाती है। मॉर्निंग सेशन की थकान कम हो जाती है।
इलाहाबाद-लखनऊ के बीच हो दोस्ताना संबंध
जस्टिस चंद्रचूड़ ने लखनऊ और इलाहाबाद बार के बीच दोस्ताना संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे बीच निजी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन न्याय दिलाना हम सबका मिशन है। भौगोलिक आधार मतभेद की वजह नहीं बनना चाहिए।
विश्वास, भागीदारी का युग शुरू किया : जस्टिस शाही
हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस एपी शाही ने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने शानदार लीडरशिप दी। उनके लिए वादकारियों का हित सर्वोपरि रहा। उनके नेतृत्व में न्याय के प्रति भरोसा बढ़ा। उन्होंने विश्वास, बराबर की भागीदारी और संतुष्टि का युग शुरू किया। क्षेत्रीय भावनाओं की कभी अनदेखी नहीं की।
अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एचपी सिंह परिहार ने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ का भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख रहा। गोरखपुर टीचर्स एसोसिएशन और यादव सिंह समेत कई मामलों में उनके फैसले मील का पत्थर हैं। फुल कोर्ट डिसीजन भी ऐतिहासिक रहे।
न्यायप्रिय, मृदुभाषी और निर्णयकर्ता
अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ न्यायप्रिय, मृदुभाषी और निर्णयकर्ता हैं। मीडिया रिपोर्टों में राज्य सरकार से टकराव की खबरें आने के बावजूद उनका व्यवहार अच्छा रहा।
...और समारोह में गूंज उठी देववाणी
विदाई समारोह में जहां सभी वक्ताओं ने अंग्रेजी में उद्बोधन दिया, वहीं असिस्टेंट सोलिसिटर जनरल एसबी पांडेय ने संस्कृत में अपनी बात रखी। उन्होंने न्याय के क्षेत्र में जस्टिस चंद्रचूड़ के योगदान की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।