स्कूल और कॉलेजों में बच्चों की सेहत बिगाड़ रहे जंक फूड की स्कूल परिसर में बिक्री जल्द बंद होगी। केंद्रीय मंत्रालय से संबद्ध फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे के बाद गाइडलाइन तैयार की है।
जल्द ही गाइडलाइन की सिफारिशों के आधार पर एक्ट में बदलाव कर स्कूल और कॉलेज परिसर और इसके 50 मीटर के दायरे में जंक फूड और शुगर व साल्ट युक्त बेवरेज (कुरकुरे, चिप्स) की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी एफएसडीए को सौंपी जाएगी।
इसके साथ ही हर स्कूल-कॉलेज में बच्चों के लिए कैंटीन संचालन को अनिवार्य बनाते हुए वहां संतुलित, पौष्टिक और परंपरागत फूड आइटम उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए स्कूल संचालक की जिम्मेदारी तय करते हुए अलग से स्कूल कैंटीन संचालन पॉलिसी भी लागू कराई जाएगी।
एफएसएसएआई सूचना व प्रसारण मंत्रालय के स्तर पर इस बात का भी पूरा प्रयास करेगा कि बच्चों को टारगेट कर तैयार किए जाने वाले जंक फूड व साल्ट-शुगर युक्त बेवरेज के विज्ञापनों के प्रसारण को प्रतिबंधित किया जाए।
कैंटीन में होंगे 80 % ग्रीन फूड आइटम
गाइडलाइन के मुताबिक, बच्चों में जंक फूड के मोह को खत्म करने के लिए स्कूल परिसरों में कैंटीन संचालन के लिए अलग पॉलिसी लागू होनी चाहिए। कैंटीन में ग्रीन श्रेणी के 80 फीसदी तक पौष्टिक खाद्य आइटम बच्चों के लिए उपलब्ध कराए जाए।
इसमें फ्रूट सलाद, पनीर, वेजिटेबल कटलेट, खांडवी, पोहा, उत्पम, उपमा, इडली, लो फैट मिल्क शेक और मौसमी प्राकृतिक फ्रूट जूस शामिल हो जबकि सिर्फ 20 फीसदी में ही रेड श्रेणी में चिह्नित ऐसे जंक फूड उपलब्ध हो जिनमें फैट, साल्ट और शुगर की मात्रा पांच फीसदी तक हो।
इसके साथ ही हर स्कूल और कॉलेज प्रबंधन भी अपने यहां पाठ्यक्रम में हेल्दी और पौष्टिक न्यूट्रीशन फूड से जुड़ी जानकारियों को शामिल कर इसके बारे में छोटी क्लास से ही बच्चों को जागरूक बनाए।
सख्त हों पैकेजिंग एक्ट के मानक
बच्चों से जुड़ी पैक फूड सामग्री के मानकों को और सख्त बनाते हुए पैकेट पर ही इसमें उपलब्ध सामग्री के बारे में हर अच्छी और बुरी जानकारी प्रकाशित कराई जाए ताकि सिर्फ विज्ञापनों के आकर्षण में सेहत का दुश्मन बनने वाली सामग्री को खरीदने से लोग बचें।
स्कूलों में जंक फूड की बिक्री रोके जाने की गाइडलाइन तैयार कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों की टीम गठित की गई थी।
विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक व चिकित्सकीय आधार पर जंक फूड, साल्ट व शुगर युक्त चिप्स, कुरकुरे, रेडी-टू-इट नूडल, फ्राइड फूड, व कन्फेशनरी आइटम के सेवन से तेजी से बढ़ते मोटापे, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर चिंता जताई थी। विशेषज्ञों ने माना कि जंक फूड में शामिल फैट, शुगर व साल्ट का सेवन न केवल बचपन छीन रहा है बल्कि बच्चों को बीमार भी बना रहा है।