लखनऊ। रसोई गैस की किल्लत पूरी तरह तो नहीं है, लेकिन सिलिंडर मिलने में हो रही देरी ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। गैस खत्म होने के बाद नया सिलिंडर समय से नहीं मिल पा रहा, ऐसे में लोगों को खाना बनाने के लिए वैकल्पिक जुगाड़ करने पड़ रहे हैं, जो अब गैस से भी महंगे साबित हो रहे हैं।
मौज्जमनगर निवासी बिब्बी ने बताया कि सिलिंडर खत्म हो जाने पर बहन रेशमा के घर से सिलिंडर लाकर काम चला रहे हैं। कुछ दिन बाद जब मेरा सिलिंडर आ जाएगा, तो उसे दे देंगे। एक टाइम लकड़ी के चूल्हे पर भी खाना बनाना पड़ा। डालीगंज में लकड़ी की टाल पर लकड़ी खरीदने पहुंचे रितेश ने बताया कि घर की महिलाएं कहीं से भी गैस का जुगाड़ करने को कह रही हैं, लेकिन गैस मिल नहीं रही। गैस से खाना बनाना सबसे सस्ता भी पड़ता है, लेकिन जब सिलिंडर नहीं मिल रहा तो लकड़ी और कोयला मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है। पास खड़े शाहिद ने बताया कि मजबूरी में दो दिन से उसके घर भी चूल्हे पर खाना बन रहा है। रोजाना 40 से 60 रुपये तक लकड़ी या कोयले पर खर्च हो जाता है। जो महीने में गैस सिलिंडर से ज्यादा बैठता है।
कल्याणपुर के मिठाई दुकानदार भाईलाल ने बताया कि गैस की किल्लत के कारण करीब पांच दिन उसने होटल बंद रखना पड़ा। अब भट्ठी का इंतजाम कर फिर काम शुरू किया है, लेकिन लकड़ी या कोयला गैस से दो से तीन गुना महंगा पड़ता है। इससे लागत बढ़ गई है। घर में इंडक्शन पर खाना बनाने से बिजली का बिल बढ़ रहा है। इस तरह गैस की किल्लत से रसोई का पूरा बजट गड़बड़ा रहा है।
गैस के लिए परेशान लोग।
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