मुख्य सचिव ने राजीव कुमार ने जेई-एईएस रोगियों के लिए फ्री एंबुलेंस की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने रोगियों के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने, संवेदनशील ग्रामों में सभी बच्चों को जेई व एईए टीकाकरण के लिए विशेष अभियान चलाने, जल निकासी, साफ-सफाई, वाटर सील शौचालय, ग्राम स्तर पर कचरा निस्तारण-प्रबंधन, शौचालय की सफाई, घर से जल निकासी के लिए जनजागरण अभियान चलाने के लिए भी कहा है।
बृहस्पतिवार को शास्त्री भवन में जेई-एईएस की रोकथाम व नियंत्रण के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस), जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) के लिए बनाई गई राज्य कार्य योजना-2018 के क्रियान्वयन को 10 फरवरी तक विभागवार कार्य योजना बनाई जाए। इसके अनुसार प्रशिक्षित नर्सों की नियुक्तियां की जाएं और चिकित्सकीय स्टाफ को समय से प्रशिक्षण दिलाया जाए।
साथ ही, रोग प्रभावित बच्चों का नजदीक के पीएचसी-सीएचसी पर इलाज कराया जाए। उन्होंने नगर विकास विभाग को नगरीय क्षेत्रों, विशेषकर मलिन-बस्तियों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराने व शौचालय और सोप-किट का निर्माण कराने के लिए कहा।
साथ ही, नगरीय क्षेत्र में खुली नालियों को ढंकने के अलावा समय-समय पर फॉगिंग भी कराई जाए। उन्होंने चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग को इन बीमारियों के नियंत्रण के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायती राज चंचल कुमार तिवारी, प्रमुख सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी, प्रमुख सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव पशुपालन सुधीर एम बोबडे मौजूद रहे।
‘क्या करें, क्या न करें’ का हो प्रचार
मुख्य सचिव राजीव कुमार ने जेई-एईएस नियंत्रण के लिए ‘क्या करें, क्या न करें’ का प्रचार-प्रसार करने और ग्रामीण स्तर पर बनी विलेज हेल्थ न्यूट्रीशन सेनिटेशन कमेटी की मदद लेने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने ग्राम्य व नगर स्तर पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने और संवेदनशील गांवों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्रत्येक मकान में शौचालय निर्माण कराकर ग्रामवासियों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए भी कहा।