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हाईवोल्टेज करंट से इंजीनियर समेत तीन झुलसे

Fri, 27 Jun 2014 04:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के 220 केवी सरोजनीनगर उपकेंद्र पर हादसा हो गया। इसमें एक इंजीनियर समेत तीन कर्मचारी झुलस गए। उपकेंद्र पर सबेरे-सबेरे हुई घटना से हड़कंप मच गया।
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आनन-फानन में इंजीनियर और कर्मचारी को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। विडंबना यह कि ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के उच्च अफसर दोपहर बाद तक हाल लेने तक नहीं पहुंचे।

बड़े इंजीनियरों की मानें तो ये दोनों 132 केवी के हाईवोल्टेज करंट से झुलसे हैं। हादसे की जांच शुरू हो गई है।

यह हादसा गुरुवार को सुबह 6:45 बजे उस वक्त हुआ जब मऊ निवासी जूनियर इंजीनियर रामधनी मौर्या, फर्रुखाबाद निवासी ऑपरेटर अनिल कुमार, लखनऊ के बसंतखेड़ा निवासी संविदा कर्मचारी सतीश कुमार ने हाईवोल्टेज करंट को बंद करने के बाद मेंटेनेंस शुरू किया।
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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रामधनी के पास मौजूद अनिल कुमार ने लाइन को अर्थ करने के लिए लोहे की चेन डाली तो उसी वक्त जोरदार धमाका हुआ और ब्रेकर से निकला आग का गोला तीनों के ऊपर गिरा।

करंट की लौ से रामधनी और अनिल कुमार के शरीर का ऊपरी हिस्सा चेहरा, कान, बाल, हाथ एवं सीना झुलस गया। वहीं सतीश कुमार का हाथ झुलस गया। रामधनी एवं अनिल कुमार का स्थानीय आवास उपकेंद्र परिसर में है।

इस हादसे की सूचना कॉलोनी पहुंची तो उपकेंद्र पर हुजूम उमड़ आया। एसडीओ दिलीप कुमार सिंह एक्सईएन एवं एसई को सूचना देकर तीनों घायलों को लेकर अस्पताल भागे।

तीनों को सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराकर उपचार शुरू किया। इस दौरान परिवारीजन अस्पताल पहुंच चुके थे।

चिकित्सकों की मानें तो रामधनी एवं अनिल कुमार का 40 से 45 फीसदी शरीर करंट से जल चुका है। वहीं सतीश का एक हाथ बुरी तरह से झुलसा है।

ऐसे हुई घटना
एक्सईएन संजय पासवान ने बताया कि जिस 63 केवीए के पॉवर ट्रांसफार्मर पर मेंटेनेंस करना था उस पर दो तरफ से 132 केवी की सप्लाई थी।

एक्सईएन का मानना कि दोनो स्रोत की बिजली तो बंद कर दी गई पर एक स्रोत का आइसोलेटर ठीक तरीके से अलग नहीं हो पाया था।

जिसके कारण सप्लाई का कट नहीं पाई। ऑपरेटर के द्वारा लाइन को अर्थ करने के लिये फेंकी गई चेन से हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि इसकी संघन जांच कराई जा रही है।

दो साल पहले पाई थी नौकरी
ऑपरेटर अनिल कुमार पत्नी कुसुम दो छोटे-छोटे बच्चों को पति की हालत देखकर बिलख रही थी। यही हाल रामधनी के परिवार का था।

अनिल की मौसी सुषमा ने बताया कि दो साल पहले ऑपरेटर पद पर उसकी नियुक्ति हुई थी। शायद पर्याप्त विभागीय प्रशिक्षण न मिलने और अनुभव के अभाव में अनिल हादसे का शिकार हुआ।

उन्होंने बताया कि एक्सईएन एवं एसई के अलावा कोई उच्च अफसर घायलों को देखने तक नहीं आया।

रामधनी वर्ष 2005 बैच के जूनियर इंजीनियर है जिनके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की है।

जोखिम के काम का नहीं बीमा
सरोजनीनगर में जूनियर इंजीनियर एवं ऑपरेटर के झुलसने के हादसे ने उत्तर प्रदेश ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।

यानी 400 केवी, 220 केवी एवं 132 केवी उपकेंद्र मौत के कुआं के समान हैं, लेकिन इन पर कार्य करने वाले इंजीनियरों एवं कर्मियों का कॉर्पोरेशन ने विभागीय बीमा नहीं कराया है।

जबकि यह इंजीनियर और कर्मचारी रोजाना जनता को बिजली देने के लिये जोखिम भरा काम करते हैं। ऐसे इंजीनियरों एवं कर्मियों ने विभागीय बीमा कराने की मांग उठाई पर प्रशासन ने दबा दी।

तीन साल में चार घटनाएं
विद्युत तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव रामवीर सिंह के अनुसार सरोजनीनगर उपकेंद्र पर तीन साल में चार घटनाएं हो चुकी है।

सबसे पहले विभागीय श्रमिक सुभाष गुप्ता की करंट से मौत हो चुकी। इसके बाद संविदा कर्मचारी राम बख्श सिंह और ऑपरेटर सुशील करंट से झुलसा।

रामवीर ने इन घटनाओं का कारण अनुभव विहीन इंजीनियर बताया। उन्होंने बताया तीन घायलों को एक्सईएन संजय पासवान भर्ती कराकर चले गये और देखरेख की जिम्मेदारी एक जूनियर इंजीनियर को सौंप दी।
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रामवीर ने प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच एवं लापरवाहों पर कार्रवाई करने की मांग की।
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