सपा-बसपा के गठबंधन में अगला सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल हो सकता है। रालोद से बातचीत की जिम्मेदारी सपा मुखिया अखिलेश यादव को सौंपी गई है। रालोद का दावा पांच सीटों पर चुनाव लड़ने का है लेकिन उसे तीन सीटें दी जा सकती हैं।
सपा-बसपा के गठबंधन में दो सीटें कांग्रेस और दो अन्य दलों के लिए छोड़ी गई हैं। अन्य दलों की सीटें रालोद को देने की तैयारी है। इनमें बागपत व मुजफ्फरनगर सीट शामिल हैं। रालोद को तीसरी सीट सपा के कोटे से मिल सकती है। इसके लिए कोई फॉर्मूला निकाला जा सकता है।
अखिलेश ने इसका संकेत भी दिया। रालोद की नजर मथुरा, हाथरस, अमरोहा, बिजनौर व बुलंदशहर सीट पर है। माना जा रहा है कि इनमें से कोई एक सीट उसे मिलेगी जबकि रालोद नेता चौथी सीट के लिए भी जोर दे रहे हैं।
ऐसी उम्मीद है कि अखिलेश यादव रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी से बातचीत करके सीटों का मसला हल कर लेंगे। दरअसल, वेस्ट यूपी में रालोद करीब 15 सीटों को प्रभावित करता है। अधिकतर सीटों पर रालोद अपने दम पर चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है लेकिन दूसरे दलों को हराने-जिताने में उसकी भूमिका रहती है।
मायावती व अखिलेश यादव की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय लोकदल का जिक्र नहीं किए जाने से रालोद के जमीनी समर्थकों में मायूसी है हालांकि उसके नेता गठबंधन को लेकर अभी आश्वस्त हैं।
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने बताया कि जयंत चौधरी की कुछ दिन पहले अखिलेश यादव से बातचीत हुई थी। अभी हम गठबंधन को लेकर नाउम्मीद नहीं हैं। जयंत गठबंधन के नेताओं से बातचीत करेंगे। उम्मीद है कि एक सप्ताह में सीटों को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।
रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि सीटों का कोई मुद्दा नहीं है। असल मुद्दा समाज को बांटने वालों को रोकने, लोकतंत्र को बचाने का है। हमारा उद्देश्य भाजपा को हराना और सौहार्द बहाल करना है। इसके लिए सभी को साथ आना होगा। हमारा समर्पण भी है त्याग भी लेकिन बातचीत सम्मानजनक होनी चाहिए।
गठबंधन की घोषणा से टला जयंत का कार्यक्रम
रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को शनिवार को लखनऊ आना था। उन्हें मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखानी थी, लेकिन सपा-बसपा के गठबंधन की घोषणा में रालोद की भूमिका साफ नहीं होने के कारण उन्होंने दौरा स्थगित कर दिया।