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यूपी के मुस्लिमों के लिए भाजपा की 'तालीम की ताकत'

Wed, 19 Aug 2015 09:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नजदीकी उद्योगपति और मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद के चांसलर जफर सरेशवाला मुसलमानों में उनके लिए सियासी कालीन बिछाएंगे।
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‘तालीम की ताकत’ अभियान के जरिये वह मोदी से मुसलमानों को जोड़ने का काम करेंगे। इसी के तहत वह 23 अगस्त को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों व बुद्धिजीवियों से रूबरू होंगे।

जफर यूनुस सरेशवाला को मोदी का नजदीकी माना जाता है। वह लंबे समय से माइनोरिटी में मोदी के लिए सियासी बैटिंग भी कर रहे हैं। उन्होंने तालीम की ताकत अभियान शुरू किया है। इसकी शुरुआत उन्होंने मुंबई से की थी लेकिन अब यूपी समेत हिंदी भाषी राज्यों पर खास ध्यान दे रहे हैं। आने वाले दिनों में वह यूपी में और सक्रिय होंगे।
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मकसद साफ है, मुसलमानों में मोदी के प्रति बनी धारणा को बदलना। भले ही लोकसभा चुनाव में भाजपा या मोदी ने मुसलमानों को जोड़ने की कारगर पहल न की हो लेकिन अब सरेशवाला के जरिये पीएम की छवि को सुधारने का काम शुरू हो गया है। सरेशवाला 23 अगस्त को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रहेंगे।

'राम मंदिर' व कॉमन सिविल कोड पर करेंगे चर्चा

‘अमर उजाला’ से बातचीत में सरेशवाला ने कहा कि उनका अभियान मुसलमानों को जागरूक बनाने का है। वह यूपी में अलीगढ़, बरेली समेत देश के 14 शहरों में कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। इनमें स्टाक मार्केट, सेबी, बड़ी कंपनियों के सीईओ या किसी बैंक के चेयरमैन आदि को ले जाते हैं। 23 अगस्त को बीएचयू (वाराणसी) में मुस्लिम छात्रों, बुद्धिजीवियों के बीच रहेंगे।

बकौल सरेशवाला, उनकी सोच है कि मुस्लिमों का सशक्तीकरण शिक्षा से ही होगा। वह कहते हैं कि निवेश में कोई भेदभाव नहीं होता। अंबानी, टाटा, बिड़ला इसी से आगे बढ़े हैं। अपना प्रोजेक्ट सामने रखिये, पैसा लगाने वालों की लाइन लगी हुई है। मुसलमानों से फाइनेंसियल इंजीनियरिंग पर ध्यान देने को कहा जाएगा।

तालीम से पता चलता है किसे वोट देना है
सरेशवाला कहते हैं, तालीम से ही यह पता चलता है कि  किसे वोट देना है, किसे नहीं और कौन सी पार्टी देश के हित में है। मुस्लिमों के दिमाग से यह बात निकालने की कोशिश की जा रही है कि वे किसी चीज के दोषी या आरोपी नहीं है। वह मुसलमानों के बीच उठाए जाने वाले मुद्दों राम मंदिर, कॉमन सिविल कोड और आरक्षण जैसे विषयों पर खुले दिमाग से चर्चा करेंगे।
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हिंदुओं ने कलाम जितना प्यार किसी को नहीं दिया

सरेशवाला के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम बेहद साधारण मुस्लिम घर में पैदा हुए लेकिन उन्होंने तालीम से यह मुकाम पाया। हिंदुस्तान के इतिहास में हिंदुओं ने इतना प्यार किसी मुस्लिम को नहीं दिया जितना डॉ. कलाम को दिया है। यह सब उनकी तालीम के कारण संभव हो पाया।

क्या मोदी का करीबी होना गुनाह है?
जफर सरेशवाला कहते हैं कि यह कहकर उनके काम की आलोचना करना गलत है कि वह मोदी के करीबी है। क्या मोदी का करीबी होना गुनाह है, पाप है।

उन्होंने कहा, हमें अक्ल है, हम समझदारी रखते हैं कि किसे पसंद करें। यह नहीं चलेगा कि कौन हिंदू परस्त और कौन मुस्लिम परस्त है। अब देखा जाएगा कि कौन मुल्कपरस्त है। अब तक मुसलमान बेवकूफ बनता रहा है कि फलां दल प्रो मुस्लिम है और फलां एंटी मुस्लिम।
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