लखनऊ। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एचसीक्यू, आइवरमेक्टिन, विटामिन, फेविपिराविर दवाएं अब कोरोना इलाज के प्रोटोकॉल से हटा दी गई हैं। इससे वे लोग असमंजस में हैं, जिन्होंने अप्रैल में दूसरी लहर के जोर पकड़ते ही ये दवाएं खाई थीं। जबरदस्त मांग के चलते करीब 30 करोड़ की ये दवाएं बिकी थीं।
एचसीक्यू दवा को लेकर कारोबारियों का कहना है कि पिछले साल ही तय हो गया था कि यह असरदायक नहीं है। किसी ने भी इसकी मांग नहीं की। कारोबारी व दवा विक्रेता वेलफेयर समिति के अध्यक्ष विनय शुक्ला कहते हैं कि अप्रैल में जब कोरोना चरम पर था, उस एक महीने में राजधानी में करीब चार करोड़ की आइवरमैक्टीन खाई गई है। हालांकि, मई में इसकी बिक्री आधी रह गई है। इसका एक कारण यह भी है कि यह तीन दिन में सिर्फ एक बार खाई जाती है।
थोक व फुटकर दवा कारोबार से जुड़े देवेंद्र पाल सिंह कहते हैं कि एक समय था कि फेविपिराविर की कमी होने लगी थी। सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप तक में इसकी खोज मची थी। अप्रैल में इस दवा का लखनऊ में 12 से 15 करोड़ का कारोबार रहा है। हालांकि, मई आते-आते मांग बहुत घट गई। इस वक्त इसका करीब पांच करोड़ का माल डंप पड़ा है। चूंकि एक दवा अलग-अलग ब्रांड और नामों से हैं, इसलिए बिक्री का निश्चित मूल्य बताना मुश्किल है। ये सभी दाम औसतन के हिसाब से और शहर में स्थित आउटलेट की संख्या के आधार पर हैं।
विटामिन सी की रही सबसे ज्यादा मांग
कोरोना काल में सबसे ज्यादा विटामिन सी की मांग रही, जो अब भी बरकरार है। औसतन एक महीने में 10 करोड़ रुपये की विटामिन सी की दवा की बिक्री हुई है।