आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) की जुलाई, 2013 की परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
जांच में परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों के बैठने की पुष्टि हुई है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में मेरठ जोन के साथ बाकी जोन में भी ऐसे मामले होने की आशंका जताते हुए विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की है।
जुलाई 2013 में हुई आईटीआई की वार्षिक परीक्षा में निजी आईटीआई संचालकों से साठ&गांठ करके करीब 20 हजार फर्जी अभ्यर्थी बैठे थे।
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परीक्षा में शामिल होने के लिए सभी आईटीआई को अपने अभ्यर्थियों की पोर्टल पर फीडिंग करनी थी। जुलाई 2012 की परीक्षा इसी पैटर्न पर हुई। इसके बाद जुलाई 2013 की परीक्षा में पोर्टल में गड़बड़ी होने की बात कहते हुए अभ्यर्थियों के परीक्षा फॉर्म ओएमआर शीट पर भरवाए गए।
ओएमआर पर करीब 20 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने परीक्षा फॉर्म भरे और परीक्षा में शामिल हो गए। इनमें से बहुत से अभ्यर्थी ऐेसे भी थे जो जुलाई 2014 की परीक्षा में शामिल होने के लिए पोर्टल पर फीड थे।
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इसके बावजूद ये सब ओएमआर से परीक्षा फॉर्म भरके जुलाई 2013 की परीक्षा में शामिल हो गए।
अमर उजाला ने 13 सितंबर, 2013 के अंक में इस मामले का खुलासा करते हुए खबर प्रकाशित की। खबर का संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव व्यावसायिक परीक्षा परिषद आलोक कुमार ने मामले की जांच करने के लिए जांच समिति का गठन कर दिया।
जांच समिति की बागडोर व्यावसायिक परीक्षा परिषद की निदेशक अनीता श्रीवास्तव को दी गई। जांच टीम ने मेरठ जोन की नौ आईटीआई को चिह्नित कर उनकी जांच की थी।
नौ में से पांच आईटीआई ने या तो जांच करवाने से मना कर दिया था या उनके यहां ताले पड़े हुए थे। चार आईटीआई जांच करवाने के लिए तैयार हुई थीं।
जांच टीम ने चार आईटीआई के रिकॉर्ड के आधार पर रिपोर्ट दाखिल की है। सूत्रों के अनुसार जांच में इन आईटीआई के रिकॉर्डों से टीम संतुष्ट नहीं हुई।
रिकॉर्ड में बगैर पोर्टल वाले अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने संबंधी पुख्ता दस्तावेज नहीं मिले। चार आईटीआई में गड़बड़ी मिलने के बाद जांच समिति ने मेरठ के साथ बाकी चार जोनों की निजी आईटीआई में इस तरह की गड़बड़ी होने की आशंका जताते हुए विस्तृत जांच की सिफारिश की है।
टीम ने अपनी रिपोर्ट गुरुवार शाम को दाखिल कर दी थी। संभावना है कि सोमवार को इस मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है।
जांच के फेर में अटका आईटीआई का रिजल्ट
आईटीआई परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थियों के बैठने संबंधी मामले की जांच के कारण करीब एक लाख अभ्यर्थियों का रिजल्ट अटका हुआ है। परीक्षा में करीब 20 हजार ऐसे अभ्यर्थियों के बैठने की बात कही जा रही है, जिन्होंने दो वर्ष के प्रशिक्षण में भाग ही नहीं लिया था।
ये अभ्यर्थी परीक्षा से ठीक पहले इनरोल हुए थे। इन अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र जारी न होने पाए इसलिए सभी अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक लिया गया है।
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