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इन बच्चों का कोई नहीं, न पुलिस न आयोग

Tue, 06 Aug 2013 08:25 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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यूपी में एक ओर बच्चे गुम हो रहे हैं तो दूसरी ओर राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर पर पुलिस इनके आंकड़ों को ठीक से बता भी नहीं पा रही।
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प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक नहीं बन सका है, ऐसे में बच्चों की गुमशुदगी एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीआरपीसी) इन्हें अपने हाथों में लेकर मामलों में उचित दिशा निर्देश जारी करेगा। राजधानी में सोमवार को गुमशुदा बच्चों के अभिभावकों के साथ आयोजित जनसभा में एनसीआरपीसी के सदस्य डॉ. योगेश दुबे ने कुछ इन शब्दों में अपनी गंभीरता दर्शाई।
पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में बच्चों के अधिकारों और संरक्षण की स्थिति जानने के लिए दौरे कर रहे डॉ. दुबे ने राजधानी में भी जनसभा की।

इसमें चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राय) और क्वालिटी इंस्टीट्यूशनल केअर एंड अल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रन (क्यूआईसीएसीयूपी) उप्र सहभागी बने। इस दौरान डॉ. दुबे ने 24 मामले सुने और पीड़ित परिवारों को कार्रवाई करवाने का विश्वास दिलाया।
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नहीं दर्ज हो पाती रिपोर्ट
उन्होंने बताया कि अधिकतर गुमशुदा बच्चे बेहद गरीब परिवारों से हैं। इन मामलों में पाया जा रहा है कि अभिभावकों की एफआईआर तक लॉज नहीं की जा रही है। ऐसे में पुलिस अगर सचेत नहीं होती तो आयोग की शरण ली जा सकती है।

यहीं प्रदेश मात खा रहा है क्योंकि यहां आयोग का गठन ही नहीं हो सका है। संसाधन रहित पीड़ित परिवार अपने लापता बच्चों के इंतजार ही करते रह जाते हैं।

हो एक टास्क फोर्स गठित
इन हालात को बदलने के लिए जरूरी है कि जल्द ही हर जिले में आयोग द्वारा एक टास्क फोर्स का गठन किया जाए। उन्होंने इसका प्रस्ताव रखते हुए बताया कि जल्द इसे हकीकत में ढाला जाएगा। इस टास्क फोर्स में डीएम और एसपी को गुमशुदा बच्चों के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा।
जन सभा में शामिल क्राय के एसोसिएट जनरल मैनेजर उप्र पंकज मेहता ने बताया कि आरटीआई के जरिए जुटाए गए प्रदेश के 24 जिलों में लापता बच्चों के आंकड़ों में सामने आया कि शहरी इलाकों में तेजी से बच्चे लापता हो रहे हैं।
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सोनभद्र में बढ़ा दर
सोनभद्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बच्चों के गायब होने की घटनाएं बढ़ी हैं। क्यूआईसीएसीयूपी की उप्र स्टेट कोऑर्डिनेटर विनिका कोहली ने बताया कि गुमशुदा बच्चों के अभिभावकों और परिजनों ने जनसभा में अपने मामले रखने के साथ ही पुलिस के व्यवहार के बारे में भी बताया जो दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से क्रूर था।
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