पिछले करीब एक महीने से चल रही आजम और मुस्लिम धर्मगुरु कल्बे जव्वाद की वर्ड वॉर से सपा सरकार की तो छीछालेदर हो ही रही है, आजम भी अपना वजूद खुद मिटाते दिख रहे हैं।
वक्फ बोर्ड के चुनाव ने होने से शुरू हुई आजम की रुस्वाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने अलग ही रंग दे डाला और सपा हाईकमान ने उनसे दूरी बनाए रखना ही शायद बेहतर समझा।
अब रविवार को सपा सुप्रीमो के भाई और सपा सरकार में कद्दावर मंत्री ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सपा आजम से दूरी बना रही है।
क्या कहा शिवपाल ने?
मौका तो दावते वलीमा का था लेकिन सवाल कसैला पूछ लिया गया, जिससे प्रदेश सरकार में नंबर दो कहे जाने वाले कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की भाव भंगिमाएं एकदम बदल गईं।
शिवपाल ने इशारों-इशारों में जता दिया कि यूपी सरकार आजम खां के ‘अंदाज’ से नहीं चलेगी। सरकार ठीक चल रही है और आगे भी ठीक चलेगी।
आजम के बयान पर बात और बढ़ी तो बोले ‘...जाकर उनसे (आजम खां) ही पूछो।’ इस दौरान शिवपाल असहज होते हुए भी खुद को सहज दिखाने की कोशिश करते रहे। कार्यक्रम में आजम को भी आना था लेकिन वे नहीं आए।
क्या सब ठीक है आजम साहब?
गौरतलब है कि पिछले दिनों आजम खां ने पत्रकारों से कहा था कि प्रदेश सरकार ठीक से नहीं चल रही है। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ।
आजम पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। एक नहीं, बार बार आजम ने मुलायम को बुरा-भला कहा और पार्टी के सूत्रों की मानें तो मुलायम को यह बात कतई पसंद नहीं आई।
हालांकि रविवार को रामपुर में उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपने संबंधों को मजबूत बताया।
पर, क्यों नहीं ले रहे कार्यक्रमों में हिस्सा
इस पूरे एपिसोड में एक तरफ सपा के कुछ ऐसे नेता आजम को किनारे करने में लगे हुए हैं, जिनकी आजम से कभी नहीं पटी।
बताया जाता है कि इस लॉबी में मुलायम के भाई शिवपाल भी हैं। शायद यही वजह थी कि शिवपाल ने लखनऊ में जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन समारोह में पूर्व सपाई अमर सिंह को मंच पर अपने बगल की सीट पर बैठाला।
हालांकि, आजम भी पार्टी को नाराज करने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अपने अड़ियल रवैये की वजह से न तो वो मुख्यमंत्री के दो कार्यक्रमों में पहुंचे, न ही जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन समारोह में गए।
इतना ही नहीं, दबे शब्दों में सरकार की आलोचना भी करते रहे। कैबिनेट मीटिंग हुई तो उसमें भी अखिलेश को डेढ़ घंटे इंतजार करवाया। ऐसे में पार्टी उनसे किनारा कर भी सकती है।