लेसा (लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई अथॉरिटी) की बिलिंग एजेंसियों की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे हैं उपभोक्ता।
हर तीसरे उपभोक्ता को गलत रीडिंग का बिजली बिल थमाया जा रहा है। इसे संशोधित कराने के लिए उपभोक्ता बिजली विभाग के चक्कर लगा रहे हैं और दूसरी तरफ लेसा को अपेक्षित राजस्व हासिल नहीं हो रहा। यह सच बिलिंग एजेंसियों की समीक्षा के दौरान सामने आया है।
शनिवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा कंप्यूट्रॉनिक्स, सांई कंप्यूटर, एन सॉफ्ट, एसएमएस, बिप्स एवं सीजीसी बिलिंग कंपनियों के कार्य की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि इस समीक्षा के दौरान संज्ञान में आया कि एजेंसियों के द्वारा जितने बिल उपभोक्ताओं को दिए जाते हैं, उसमें 40 फीसदी सही नहीं होते हैं। ऐसे बिलों में अधिकतर की मीटर रीडिंग गलत होती।
उपभोक्ता को उनका भुगतान करने के बजाय संशोधित कराने के लिए दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं को सही रीडिंग के बिल नहीं मिले, तो ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कंपनी प्रतिनिधियों को फटकार लगाते हुए कहा कि अगस्त में लेसा को 200 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली के लक्ष्य को पूरा करना है। उन्होंने हर एजेंसी को अगस्त में बिल बनाने के लक्ष्य को निर्धारित किया।