आए दिन फर्जीवाड़े करने वाले एलडीए के बाबुओं-इंजीनियर्स का एक और कारनामा सामने आया है। 28 लाख रुपये में टू-बीएचके फ्लैट बताकर एक कमरे का फ्लैट आवंटियों को बेच दिया। ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना में जनेश्वर एंक्लेव में यह गोलमाल सामने आया है।
बिक्री शुरू होने के करीब दस दिन बाद जब यह मामला खुला तो अब जिम्मेदार अपनी गर्दन बचाने को इसे तकनीकी गड़बड़ी का नाम दे रहे हैं।इक घपले की शुरुआत 19 नवंबर 2017 को हुई। 48 वर्गमीटर कारपेट एरिया के एक कमरे के फ्लैट को नोटिस में टू-बीएचके का लिख दिया गया।
फ्लैट खरीदने के इच्छुक लोगों ने जब 28 लाख रुपये में टू-बीएचके फ्लैट और कब्जा दो साल में देने की योजना के बारे में सुना तो बुक कराना शुरू कर दिया। कई फ्लैट इस बीच बुक हो गए तो कुछ खरीदार फॉर्म खरीद कर पंजीकरण का चालान भी जमा कर दिए। आवेदकों ने 10 प्रतिशत पंजीकरण धनराशि जमा करने के लिए डीडी बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
एलडीए की हरकत से पर्दा मंगलवार को तब उठ गया जब एक खरीदार ने एलडीए में फ्लैट के डिजाइन को लेकर पूछताछ की। इसके बाद संपत्ति विभाग के एक बाबू ने खुलासा किया यह 2बीएचकेनहीं बल्कि 1बीएचके फ्लैट है। इसके बाद आनन-फानन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ डेस्क से बुकिंग बंद कराई गई। वहीं बुक करा चकेआवंटियों के डीडी जमा करने और आवंटन पत्र जारी करने पर रोक लगा दी गई।
हर स्तर पर लापरवाही
नोडल अधिकारी पहले आओ-पहले पाओ योजना और संयुक्त सचिव डीएम कटियार का कहना है कि गलती संपत्ति विभाग, नियोजन अनुभाग और इंजीनियरिंग सेक्शन के लेवल पर हुई है। सभी से ‘पहले आओ-पहले पाओ’ में बेचने केलिए रखे एक फ्लैट की सूचना और कीमत के अलावा डिजाइन भी मांगे गए थे। फ्लैटों के डिजाइन किसी ने उपलब्ध नहीं कराए। ऐसे में नोटिस में 1बीएचके की जगह 2बीएचके गलती से टाइप हो गया। इस गलती के आधार पर ही काउंटर पर बैठी टीम ने भी बुकिंग कर दी।
48वर्गमी. क्षेत्रफल में 2बीएचके के फ्लैट को 28 लाख रुपये में बेचने की जानकारी बाबू से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के पास तक पहुंची। उनके अनुमोदन के बाद ही इन फ्लैटों की बिक्री खोली गई। ऐसे में किसी ने भी इस गलती की तरफ इशारा करने की जरूरत नहीं समझी।
‘अब तो मैं फंस गया....’
एक परिवार के लिए 2बीएचके फ्लैट की जरूरत होती है। 2019 में कब्जा मिलना प्रस्तावित होने के बाद भी जनेश्वर एंक्लेव में बुकिंग कराई। अब पता चल रहा है कि यह तो 1बीएचके ही था। दूसरा 2बीएचके लेने केलिए मुझसे कहा गया। इसकी कीमत 60 लाख रुपये से अधिक है। इतना बजट मेरा नहीं है। अब मैं फंस गया हूं कि क्या करूं? - तुषार, आवंटी
नियेाजन, संपत्ति और इंजीनियरिंग अनुभाग को पत्र भेजा गया है कि आखिर यह गलती कैसे हुई? इन फ्लैटों केलिए आवंटन पत्र जारी नहीं होगा। आवंटी अगर पैसा वापस लेना चाहे तो उसे रिफंड कर दिया जाएगा। गलती डिजाइन बिक्री के समय मौजूद नहीं होने की वजह से हुई। अब सभी फ्लैटों के डिजाइन इंजीनियरिंग और नियोजन अनुभाग से मांगे गए हैं। - डीएम कटियार, संयुक्त सचिव, एलडीए