इस निर्णय से जनता को कितना फायदा होगा यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन इसका तात्कालिक नतीजा ये हुआ कि ब्यूरोक्रेसी में हमेशा दो नंबर पर माने जाने वाली आईपीएस लॉबी की बांछे खिल गई हैं। दूसरी ओर आला ब्यूरोक्रेट आईएएस व पीसएस अफसर चुप्पी साधे हैं।
इस पर पूर्व मुख्य सचिव अतुल गुप्ता का कहना है कि आम लोगों के पास पुलिस उत्पीड़न के बाद अपना पक्ष रखने के लिए जिला प्रशासन एक मजबूत विकल्प था। अब उन्हें पुलिस कांस्टेबिल से पुलिस कमिश्नर तक एक ही सिस्टम से दो-चार होना पड़ेगा। कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा व्यवस्था में निचले स्तर पर सुधार की जरूरत थी, लेकिन किया गया ऊपरी स्तर पर। पर, अब जो भी निर्णय हुआ है, उसके बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद की जानी चाहिए। बेहतर नतीजे आए तभी प्रयास सार्थक होगा।