मुरादाबाद के एसएसपी रहने के दौरान तीन फालोवरों को डंडे व लात घूंसों से पीटने के आरोप में निलंबित किए गए आईपीएस राजेश मोदक राव को सरकार ने चुपचाप बहाल कर दिया है।
इस बहाली के पीछे सियासी समीकरणों के होने की चर्चा है।
राजेश मोदक को निलंबित करते समय राज्य सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय जांच कराए जाने की बात कही थी।
तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह ने यह बयान भी दिया था कि जांच बरेली जोन के आईजी को सौंपी गई है जबकि बरेली जोन के आईजी आलोक शर्मा ने पूछे जाने पर कहा कि उन्हें अभी तक ऐसे कोई आदेश हासिल नहीं हुए हैं।
अब सरकार के प्रवक्ता का दावा है कि राजेश मोदक का निलंबन दो दिन पहले समाप्त कर उन्हें बहाल कर दिया गया है।
एनेक्सी के मीडिया सेंटर में मंगलवार को खबरनवीसों के सवालों का जवाब दे रहे आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने स्वीकार किया कि सरकार ने राजेश मोदक को बहाल कर दिया है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में राजेश मोदक के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश किए गए थे, जिसकी रिपोर्ट आ गई है।
उनसे जब पूछा गया कि राज्य सरकार ने राजेश मोदक को मातहतों के साथ मारपीट करने के आरोप में निलंबित कर जांच कराने की बात कही थी, इस पर आईजी ने कहा कि निलंबन दंड नहीं है।
विभागीय जांच को बाद जब दोष तय हो जाएगा तभी राजेश मोदक के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की बात आएगी। उन्होंने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया कि प्रारंभिक जांच किसने की और इसकी रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आए हैं।