उत्तर प्रदेश के संभल में हुए दंगों की जांच रिपोर्ट जांच आयोग ने गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। 24 नवंबर 2024 को मस्जिद सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी। इसकी जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति डीके अरोड़ा की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग को सौंपी गई थी।
जांच आयोग ने 450 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में न केवल 24 नवंबर को हुई हिंसा का ज़िक्र है, बल्कि संभल में इससे पहले कब-कब दंगे हुए, इनका भी उल्लेख किया गया है। उन दंगों के दौरान क्या-क्या हुआ, इसका भी पूरा विवरण लिखा गया है।
बताते चलें कि संभल में हुई हिंसा पर तैयार की रिपोर्ट में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का भी ज़िक्र है। इसमें बताया गया कि कभी यहां पर 45 प्रतिशत आबादी हिंदू थी। लेकिन, वर्तमान में यह घटकर 15 से 20 प्रतिशत ही रह गई है।
रिपोर्ट में संभल में बीते सात दशक के दौरान हुए 15 दंगों, उनमें हुए नुकसान और टकराव की वजहों का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक संभल में 1936 से 2019 तक 15 दंगे हुए, जिनमें 213 मौतें हुईं। इनमें 209 हिंदुओं की हत्या हुई थी।
1978 में होली के बाद 184 हिंदुओं का नरसंहार हुआ था, जबकि किसी भी मुस्लिम की मृत्यु नहीं हुई थी। सभी दंगों और उपद्रव में कुल मिलाकर सिर्फ चार मुस्लिमों की मौत की जानकारी दस्तावेजों की पड़ताल में आयोग को मिली। इनमें दो मौतें 1992 के अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद भड़के दंगे और दो लोगों की मौत वर्ष 2019 में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में हुई थी।
धार्मिक स्थल भी निशाने परसंभल में हिंदुओं को निशाना बनाने के साथ धार्मिक स्थलों का अस्तित्व भी खत्म किया जाता रहा। संभल में 68 तीर्थ स्थल और 19 पावन कूप थे, जिन पर कालांतर में तुष्टीकरण की राजनीति की वजह से कब्जा कर लिया गया। प्रदेश सरकार ने 30 मई 2025 को इन कूपों का पुनरुद्धार किया है। इसके अलावा हरिहर मंदिर का उल्लेख भी किया गया है, जहां बाबर काल के साक्ष्य मिलने का जिक्र है।