सीएमओ स्वीकार करते हैं कि अधिकतर निजी एंबुलेंस मानकों को पूरा नहीं करती हैं। इन एंबुलेंस में सिर्फ ऑक्सीजन सिलिंडर होता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट के साधन भी नहीं होते हैं। एडवांस कहे जाने वाली एंबुलेंस में प्रशिक्षित आपातकालीन चिकित्सा टेक्नीशियन (ईएटी) या पैरामेडिक्स मौजूद होने चाहिए, जो आपात स्थिति में मरीज को सीपीआर, और ऑक्सीजन दे सके।
आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग काकोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।
ऑक्सीजन छोड़ अन्य मानक पूरे नहीं करतीं एंबुलेंस
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।