लखनऊ। लोकबंधु अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले की जांच अभी तक आगे नहीं बढ़ सकी है। आरोप है कि जांच कमेटी अब तक लापरवाह डॉक्टरों और स्टाफ को चिह्नित नहीं कर पाई है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिजनों के बयान दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ेगी।
अनुराग सिंह ने बीते रविवार दोपहर करीब 12 बजे गर्भवती पत्नी ऊषा को लोकबंधु अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि डॉक्टर ने जांच के बाद इंजेक्शन लगाकर उन्हें घर भेज दिया। उसी शाम ऊषा को दोबारा तेज दर्द उठा, जिसके बाद परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई। अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में ही प्रसव हो गया। इस दौरान ऊषा को काफी रक्तस्राव हुआ।
पति के मुताबिक, रात करीब 8:14 बजे ऊषा और नवजात को लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया। नवजात को एसएनसीयू में ले जाया गया, जहां आधे घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। प्रसूता को गंभीर हालत में क्वीनमेरी रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया था। अस्पताल निदेशक डॉ. विवेक गुप्ता ने जांच कमेटी गठित की थी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को बयान दर्ज कराने के लिए परिजनों को बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। अब दोबारा पत्र भेजकर बुलाया गया है।