फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी मान्यता देने का मामला: फर्जीवाड़े में मास्टरमाइंड की पत्नी भी शामिल, दफ्तर में लगा ताला

Sun, 23 Apr 2023 09:49 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

नर्सिंग व पैरा मेडिकल संस्थानों को फर्जी मान्यता देने के मामले में बरेली निवासी सुधीर यादव खेल का असली सरगना है। पूरे खेल में उसकी पत्नी की भी भूमिका मिली है।
विज्ञापन
- फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सवा सौ नर्सिंग व पैरा मेडिकल संस्थानों को फर्जी मान्यता देने के मामले में पुलिस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जीवाड़े में मास्टरमाइंड की पत्नी भी शामिल रही है। दस्तावेजों में उसके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य हैं। पुलिस की एक टीम जल्द दंपती से पूछताछ करने के लिए बरेली जाएगी। वहीं, राजधानी के गोमतीनगर स्थित आरोपी के दफ्तर में ताला पड़ गया है।

विज्ञापन


उप्र स्टेट पैरा मेडिकल फैकल्टी की तरफ से बीते बुधवार को विभूतिखंड थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि स्टेट पैरा मेडिकल फैकल्टी के नाम से प्रदेश में करीब सवा सौ संस्थानों को फर्जी मान्यता दी गई।

ये भी पढ़ें - यूपी निकाय चुनाव: भाजपा ने दूसरे चरण के घोषित किए प्रत्याशी, मुस्लिम उम्मीदवारों को भी दिया टिकट
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - सपा के लिए बड़ा झटका: शाहजहांपुर से पार्टी की मेयर प्रत्याशी भाजपा में हुईं शामिल


एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने बताया कि जांच में सामने आया कि बरेली का सुधीर यादव नाम का शख्स फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड है। उसी ने फर्जी वेबसाइट तैयार कर ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये फर्जी मान्यता देने लगा। जो उसके झांसे में आए उन्होंने रकम जमा की। उसके आधार पर उसको फर्जी मान्यता का दस्तावेज थमा दिया गया। इसमें सुधीर की पत्नी की भी मिलीभगत रही।
विज्ञापन


फर्जीवाड़े संबंधी दस्तावेजों में उसका नाम कई जगह दर्ज है। जो उनके खिलाफ सुबूत हैं। एडीसीपी ने बताया कि आरोपी को नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही आरोपियों से पूछताछ शुरू की जाएगी।

कर्मचारियों को क्लीनचिट
पुलिस टीम सुधीर के दफ्तर पहुंची थी। जहां पर दो महिला कर्मचारी थीं। दोनों का काम आवेदन संबंधी दस्तावेजों की फाइल तैयार करना व उससे संबंधित जानकारी साझा करना था। एडीसीपी ने बताया कि इन कर्मचारियों की कोई भूमिका फर्जीवाड़े में नहीं मिली है। वे 10-10 हजार रुपये प्रतिमाह सेलरी पर नौकरी करती थीं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें