लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में दवा घोटाले की जांच पूरी हो गई है। पांच सदस्यीय कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ अहम साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट के आधार पर एक और डॉक्टर पर जल्द ही गाज गिर सकती है।
इस मामले में तीन संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। नियमित फार्मासिस्ट को भी निलंबित किया गया। विभागाध्यक्ष को भी पद से हटाया जा चुका है। संविदा कर्मचारियों की एजेंसी से गबन की राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। कमेटी दूसरे फेज की जांच रिपोर्ट सोमवार को केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद को सौंपेगी। इसके बाद आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक डॉक्टर का निलंबन किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच पूरी हो गई है। कमेटी सोमवार को अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी।
यह है मामला
असाध्य रोग योजना के तहत कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज का प्रावधान है। बड़ी संख्या में गरीब मरीज इस योजना पर निर्भर रहते हैं। यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना में खेल हुआ। करीब छह माह में योजना के तहत दवाओं का बजट 10 लाख से बढ़कर 45 लाख तक पहुंच गया था। योजना के तहत महंगी कैंसर, आयरन व प्रोटीन की दवाएं खरीदी गई थीं। करीब ढाई करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई। यहां तक कि कुछ ऐसे मरीजों के नाम पर भी महंगी कैंसर दवाओं के इस्तेमाल का आरोप लगा है, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी।