लखनऊ। हुसैनगंज खंड में बिजली विभाग के इंजीनियरों के पांच मंजिला एक इमारत को अनियमित तरीके से बिजली कनेक्शन देने के मामले की जांच बृहस्पतिवार से शुरू हो गई है। आरोप है कि इंजीनियरों ने विद्युत लोड की असली गणना दबा दी और बिना ट्रांसफार्मर व 11 हजार वोल्ट की लाइन लगाए ही बिल्डर को बिजली कनेक्शन दे दिया।
10 अप्रैल को अमर उजाला में पांच मंजिला इमारत को दर्शाया तीन और कर दिया उजाला शीर्षक से प्रकाशित खबर में जेई, एसडीओ और एक्सईएन की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इस रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने संज्ञान लेते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल को जांच के निर्देश दिए हैं।
सर्किल अफसर ने शुरू की जांच, दस्तावेज तलब
मामले में इलाके के सर्किल अफसर केके चौधरी से रिपोर्ट मांगी गई है, जिस पर उन्होंने तुरंत जांच शुरू कर दी है। अफसर ने एक्सईएन से स्वीकृत 48 किलोवाट लोड संबंधी सभी दस्तावेज तलब किए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत जांच एक कमेटी से कराने की तैयारी है।
इंजीनियरों पर दर्ज हो सकती एफआईआर
जांच में सामने आया है कि जेई ने बिल्डर के पहले आवेदन पर 80 किलोवाट विद्युत लोड निर्धारित किया था, जिसके तहत बिल्डर को 100 केवीए ट्रांसफार्मर और 11 हजार वोल्ट की लाइन अपने खर्चे पर लगानी थी, मगर बाद में दूसरे जेई और एसडीओ ने बिना निरीक्षण किए भवन को सिर्फ तीन मंजिला बताकर 48 किलोवाट लोड का अनुमोदन कर दिया। इसके चलते दोनों इंजीनियरों पर एफआईआर दर्ज होने की संभावना है।
इंजीनियरों का दावा - लोड स्वीकृति के बाद बढ़ाए दो तल
जांच में घिरे जेई, एसडीओ और एक्सईएन का कहना है कि जब लोड स्वीकृत किया गया था, तब इमारत केवल तीन मंजिल की थी। बिल्डर ने लोड स्वीकृति के बाद दो अतिरिक्त मंजिलें बनवाईं।