‘मेरा बेटा बेकुसूर है। उसे फर्जी फंसाया गया है। आज तक मोहल्ले में किसी से उसका झगड़ा नहीं हुआ। किसी आतंकी संगठन से उसका वास्ता होने का सवाल ही नहीं।
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पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं है, जांच में वह निर्दोष साबित हो जाएगा।’ यह कहना है इस्लामिक एस्टेट (आईएस) का संदिग्ध आतंकी बताकर पकड़े गए मो. अलीम की मां इशरत जहां और पिता मो. सलीम का।
एनआईए और एटीएस की संयुक्त टीम जब से इंदिरानगर की मायावती कॉलोनी (बसंत विहार) से अलीम को पकड़कर ले गई है, तब से उनका हाल बेहाल है। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि उनका इकलौता बेटा आतंकवादी भी हो सकता है।
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रोज नमाज पढ़ता था, शराब और सिगरेट से दूर था
सलीम ने बताया कि उनका इकलौता बेटा अलीम धार्मिक प्रवृत्ति का था। नियमित रूप से नमाज पढ़ता था। शराब और धूम्रपान से कोसों दूर था। शादी-ब्याह में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करके अपने जेबखर्च का इंतजाम करता था।
इसके बाद जो समय बचता, उसमें मुंशी पुलिया स्थित सैलून में उनका हाथ बंटाता था। इंदिरानगर के इरम स्कूल से उसने हाई स्कूल के बाद चिनहट के रामा कॉलेज से बारहवीं पास की और अब गोंडा के सरयू डिग्री कॉलेज से बीकॉम तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था।
मां इशरत जहां ने बताया कि करीब दो साल पहले अलीम ने अपने मामू से फोटोग्राफी सीखी थी। इसके बाद कैसरबाग में मेराज की दुकान पर काम करने लगा। दोस्त नीरज के साथ दस दिन पहले बनारस में वैवाहिक समारोह में फोटोग्राफी करने गया था।
अन्य शहरों में भी अक्सर उसका आना-जाना लगा रहता था। काम से लौटकर अपने कमरे में जाकर सो जाता था। घर पर उससे न कोई मिलने आता था और न ही वह किसी के घर जाता था।
बहन की शादी के बाद महीने भर तक रहा था लापता
अलीम की बहन हिना उर्फ गुड़िया की शादी 28 नवंबर को हजरतगंज में आरिफ से हुई थी। रिश्तेदारों ने बताया कि शादी के लगभग दस दिन बाद अलीम एक महीने तक लापता रहा। उसने अपने मां-बाप को बताया था कि वह जमात में शामिल होने गया था।
मायावती कॉलोनी में मो. सलीम का लगभग 20 साल पुराना साधारण-सा मकान है। सलीम वर्षों तक सऊदी अरब में नौकरी करते रहे। पत्नी इशरत जहां ने ही बेटे अलीम व बेटी गुड़िया की परवरिश की। इसी बीच सलीम ने प्राइम प्लाजा में दुकान खरीदी। बाद में सऊदी अरब से लौटकर जमजम मेंस पार्लर के नाम से अपना सैलून शुरू कर दिया।
सलीम ने कहा कि उनका बेटा पूरी तरह निर्दोष है। उसे इंसाफ दिलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे। वॉट्सएप, चैटिंग और फेसबुक को आधार बताकर उसे आतंकी नहीं बताया जा सकता। 21 साल के अलीम को पुलिस पूछताछ के नाम पर ले गई थी। एनआईए व एटीएस की संयुक्त टीम ने उनका पूरा घर खंगाला, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। सिर्फ अलीम के दो मोबाइल फोन वे अपने साथ ले गए।
लड़कियां का बगैर नकाब के घूमना उसको पसंद नहीं था
अलीम अपने धर्म के प्रति कट्टर सोच रखता था। मां इशरत जहां ने बताया कि अलीम को महिलाओं-लड़कियों का बगैर नकाब घूमना-फिरना या मर्दों के सामने आना पसंद नहीं था। वह उन्हें बुर्के में ही रहने की हिदायत देता था। धर्मगुरुओं की बातों को ध्यान से सुनता और उन पर अमल भी करता था। अक्सर वह जमात में शामिल होने जाया करता था।
अलीम को महंगे मोबाइल फोन का शौक था। पिता ने बताया कि कुछ महीने पहले ही अलीम ने नया महंगा मोबाइल फोन खरीदा था। दस हजार रुपये कैश दिए थे। बाकी की किस्तें जाती थीं। इंटर पास करने पर उसे लैपटॉप मिला था, जो उसने फरीदीनगर में अपने दोस्त को दे दिया था।
वहीं दोस्तों ने बताया कि अलीम के मोबाइल फोन में कई ऐसे एप डाउनलोड थे, जिनके बारे में वे जानते तक नहीं। अलीम फेसबुक व अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट पर काफी सक्रिय था। मोहल्ले के लोगों में आक्रोश, घर में कैद हुआ परिवार अलीम की गिरफ्तारी से मोहल्ले के लोगों में काफी आक्रोश है।
सलीम की दुकान में तोड़फोड़ के बाद कुछ लोगों ने उनके घर पर भी हमला करने की तैयारी कर ली। इसे देखते हुए पुलिस ने घर पर सुरक्षा बढ़ा दी। लोगों के आक्रोश को देखते हुए सलीम, इशरत जहां व परिवार के अन्य सदस्यों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।
पड़ोस में रहने वाले उमेश सिंह, मनोज कुमार, सुधीर ने बताया कि अलीम से अक्सर चलते-फिरते उनकी दुआ-सलाम होती थी। वह सबसे हंसकर मिलता था। उन्हें कभी उसका व्यवहार संदिग्ध नहीं लगा।
वे हैरत में हैं कि अलीम के संबंध किसी आतंकी संगठन से हैं। पड़ोसी व चाची समीम सलमानी ने कहा कि अलीम बेहद अच्छे स्वभाव का था। पड़ोसी दुकानदार सुशील कुमार ने कहा कि अलीम से मिलने उसके घर पर किसी बाहरी को उन्होंने आते-जाते नहीं देखा।