ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन(एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी कहते हैं कि अब तक सेकुलरिज्म, विकास और सुरक्षा के नाम पर धोखा देने की राजनीति हुई है। हम इसे नहीं चलने देंगे। यूपी में हमारा मुकाबला अवसरवादी, कम्युनल ताकतों से है।
वह इस बात से इन्कार करते हैं कि एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने से भाजपा को लाभ मिलेगा। कहते हैं, 2014 में मजलिस यूपी में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ी थी, फिर भाजपा को कैसे 73 सीटें मिल गईं। राजधानी आए ओवैसी से ‘अमर उजाला’ ने कई मुद्दों पर बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश-
सवाल- आप कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, आपकी रणनीति क्या है?
जवाब- अभी तक 36 सीटें तय हुई हैं। प्रदेश में कितनी सीटों पर लड़ना है, यह फैसला एआईएमआईएम की स्टेट यूनिट को करना है। हमारी रणनीति साफ है, सेकुलरिज्म और विकास के नाम पर धोखा देने वालों को बेनकाब करेंगे। हमारा मकसद है कि विधानसभा में सही नुमाइंदे पहुंचें। वे न सिर्फ धर्मनिरपेक्षता, विकास और सुरक्षा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे मजबूती से उठाएं।
सवाल- आरोप लगते हैं कि आपके चुनाव लड़ने से भाजपा को मदद मिलेगी?
जवाब- ऐसा कहना समाजवादी पार्टी का फ्रस्ट्रेशन है। वे बताएं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में तो ओवैसी नहीं था। तब यादव फैमिली के सिर्फ 5 लोग ही क्यों जीते। एक भी मुसलमान संसद नहीं पहुंचा। सपा के लोग सेकुलरिज्म के ठेकेदार बनते हैं, लेकिन मुसलमानों के लिए कुछ नहीं करते हैं।