लखनऊ। प्याज कारोबारी उमाशंकर सिंह की हत्या का कारण पुलिस अब तक पता नहीं कर सकी है। नामजद आरोपियों से पूछताछ में भी अहम जानकारी नहीं मिली है।
पुलिस की जांच रुपये की लेनदेन के विवाद की ओर घूम गई है। सीसीटीवी कैमरों से कुछ संदिग्ध वाहन नजर आए हैं। अंधेरे की वजह से फुटेज साफ नहीं मिली है।
सुल्तानपुर के लंभुआ के भरखरे निवासी उमाशंकर सिंह की हत्या में नामजद मुख्य आरोपी महिला मित्र वैशाली को पूछताछ के बाद फिलहाल पुलिस ने छोड़ दिया। वैशाली के भाई अविनाश, अनुराग और प्रेमी संदीप हिरासत में हैं। पुलिस अफसरों ने तीनों से कई घंटे पूछताछ की।
सूत्र बताते हैं कि इसमें पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली। पुलिस को इसका पता चला है कि वैशाली का रिश्ता उमाशंकर के गांव से है, तभी से दोनों में परिचय था। वैशाली गोमतीनगर में चाय का ठेला लगाती है। संदीप पांडेय भी उसके पास चाय और फास्ट फूड का ठेला लगाता है।
पार्टनर पर भी पुलिस की निगाहें
उमाशंकर बड़े कारोबारी थे। सूत्रों के मुताबिक एक बाहुबली के संरक्षण में बड़े-बड़े ठेके लिए, लेकिन उसकी हत्या के बाद खुद को सीमित कर लिया। बालू-मौरंग के साथ पार्टनरशिप में प्याज का काम शुरू किया। इसमें भी काफी रुपया लगाया। पुलिस पता लगा रही है कि उमाशंकर के किन लोगों के साथ कारोबारी रिश्ते थे। इसकी भी आशंका है कि लेनदेन के विवाद में उमाशंकर की हत्या की गई है।
शव देख बेसुध हो गई मां व पत्नी
उमाशंकर का शव बुधवार शाम सात बजे घर पहुंचा तो मां व पत्नी दहाड़े मारकर रोने लगीं। ग्रामीण घर के बाहर जमा हो गए। देर शाम तीर्थस्थल धोपाप में गोमती के किनारे शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।