भगवा पार्टी में शह और मात का खेल बदस्तूर जारी है। मामला एक प्रदेश प्रभारी से जुड़ा है।
अभी तक इन प्रभारी के लखनऊ की धरती पर कदम रखते ही पार्टी मुखिया का खुफिया तंत्र ऐसा सक्रिय होता कि उनके हर काम की सूचना मुखिया को होती। लोग मन मसोस कर रह जाते कि प्रभारी को अपना दर्द कैसे बताएं।
प्रभारी से वही मिल पाता जिसे पार्टी के मुखिया मिलवाना चाहते। चाल जिसकी भी हो लेकिन मुखियाजी इस बार तिलमिला कर रह गए। दरअसल मुखियाजी प्रभारी को लेने एयरपोर्ट पहुंचे।
पर, प्रभारी दूसरी गाड़ी में बैठकर वहां पहुंच गए जहां मुखियाजी ने सपने में भी नहीं सोचा था। तीन दिन लखनऊ प्रवास के दौरान प्रभारी का रहना, खाना और सोना सब कुछ नए ठिकाने पर।
बेचारे पार्टी मुखिया और उनका तंत्र, करे भी तो क्या करे। यहां तक तो ठीक था। मुखिया के पैरों के नीचे से धरती उस समय खिसक गई जब प्रभारी ने टिकट चाहने वालों से एक-एक करके और अकेले में मिलने का फैसला किया।
पार्टी के मुखिया दूसरे खेमे को मात देने के लिए कौन सा दांव आजमाएंगे, यह तो आगे पता चलेगा। फिलहाल मुखियाजी ने अपने खुफिया तंत्र को यह चेतावनी जरूर दे दी है कि दोबारा ऐसा हुआ तो वे सबको औकात में ला देंगे।