सूबे के मुखिया इन दिनों खबरनवीसों से नाराज हैं। वहीं विरोधी दल भी उन पर हमलों का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।
ऐसे ही कांग्रेस से जुड़े एक नेताजी ने एक कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से कह डाला, इस रियासत में तो आम आदमी की जान से ज्यादा कीमती ठुमका है।
वे यहीं नहीं रुके। कहा, दंगे में जो मारे जाते हैं उनके लिए रियासत के मुखिया पांच लाख देते हैं जबकि ठुमकों पर एक करोड़ खर्च कर देते हैं। वाह रे समाजवाद...। क्या लोहियाजी ने यही सिखाया है।