लखनऊ के सबसे प्राचीन और चर्चित शिवालयों में शुमार मनकामेश्वर महादेव मंदिर डालीगंज में गोमती के किनारे बना है। बताते हैं कि बाबा मनकामेश्वर पहली बार त्रेतायुग में तब सामने आए जब लक्ष्मणजी माता सीता को वन छोड़कर लौट रहे थे।
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तब उन्होंने गोमती के किनारे शिवलिंग स्थापित कर उसका पूजन किया। कालांतर में जीर्णोद्धार के बाद यह मनकामेश्वर मंदिर स्वरूप में आया। मंदिर में मुख्य शिवालय में साढ़े तीन फीट के अरघे के अंदर, लगभग डेढ़ फीट ऊंचा रजत आच्छादित शिवलिंग है।
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लगभग 50 फीट ऊंचे इस मंदिर का नाम कई वर्षों पहले मंदिर के एक महंत की मनोकामना तत्काल ही पूरा हो जाने पर मनकामेश्वर पड़ा। सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर भोर से ही भक्तों की कतार एक-डेढ़ किमी. दूर तक लगती है।
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कुछ समय से यहां आने वाले भक्तों को शिवभक्तों की ओर से नि:शुक्ल गंगाजल मुहैया कराया जाता है। मंदिर के विशालकाय शिवलिंग-अरघे को बहुमूल्य धातुओं से ढंका गया है। मठ मंदिर की महंत देव्यागिरि ने बताया कि इन दिनों मंदिर के सामने गोमा के तट संवर रहे हैं। मनकामेश्वर उपवन में हर पूर्णिमा पर गोमा की आरती शुरू की गई है।