लखनऊ। शहर की स्थापत्य धरोहरों और उनके संरक्षण को लेकर भारतीय इंटीरियर डिजाइनर्स संस्थान (आईआईआईडी) की ओर से कोठी गुलिस्तां-ए-इरम में डिजाइन पे चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने नई पीढ़ी में भी धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चर्चा की।
पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा कि आजकल के बच्चे ऐतिहासिक स्थलों के बजाय मॉल जाना पसंद करते हैं। सोशल मीडिया ने त्वरित संतुष्टि को सामान्य बना दिया है, जिससे हर चीज मोबाइल पर उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में, इस तरह के आयोजन इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति न केवल बच्चों, बल्कि सभी में रुचि को पुनर्जीवित करने में भूमिका निभाते हैं।
आर्किटेक्ट विपुल वार्ष्णेय ने विरासत भवनों के संरक्षण और उनके उपयोग पर बल दिया। कार्यक्रम को मॉडरेट कर रहीं एकेटीयू की डीन डॉ. वंदना सहगल ने बताया कि यह कार्यक्रम आईआईआईडी की आगामी प्रदर्शनी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया गया था। इस दौरान आईआईआईडी के अध्यक्ष प्रसन्नजीत सन्याल, अविरल अग्रवाल, रोहित गुप्ता, नीरज कुशवाहा, वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र, तौहीद, आदि मौजूद रहे।