मौका तो लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में मंगलवार को लालकृष्ण आडवाणी सहित ढांचा ध्वंस के अन्य आरोपियों की हाजिरी का था। पर, जैसे दृश्य सामने आए। जिस तरह प्रदेश सरकार से लेकर सत्तारूढ़ दल भाजपा आडवाणी व अन्य भाजपा नेताओं तथा इस मामले में आरोपी साधु-संतों के साथ खड़ी नजर आई, उसने बहुत कुछ कह दिया।
एक संदेश तो यह निकला कि भले ही आडवाणी व जोशी भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में पहुंच गए हों लेकिन संघ परिवार के लिए अभी अप्रासंगिक नहीं है। दूसरा संदेश यह कि चर्चाएं भले ही तरह-तरह की होती रही हों लेकिन मंदिर मुद्दे और अयोध्या के घटनाक्रम सेे जुड़े भगवा पात्रों का महत्व बरकरार है।
एजेंडे को धार मिलती दिखी तो इन्हें भविष्य में ‘महत्वपूर्ण स्थान’ भी दिया जा सकता है। यह भी संदेश देने की कोशिश की गई कि बात हिंदुत्व के एजेंडे की होगी तो सरकार को आरोपियों के साथ खड़े होने में भी कोई संकोच नहीं है।
यह भी है बानगी
पेशी के लिए पहुंचे आडवाणी
हम हैं साथ-साथ
भगवा टोली के रणनीतिकारों ने शायद इस मौके का सियासी लाभ उठाने की पूरी पटकथा लिख रखी थी। जिस तरह का घटनाक्रम चला उससे यह बात और भी साफ हो गई। सरकार और भाजपा ने इस बहाने संदेश देने की कोशिश की कि हिंदुत्व की लड़ाई की धुरी अयोध्या पर एजेंडे को धार देने पर वह एक हैं।
न केंद्र की सत्ता संभाल रहे भगवा चेहरों का एजेंडा बदला है और न प्रदेश में योगी तथा उनके मंत्री बने साथियों का अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प रत्तीभर बदला है। इस बहाने भगवा टोली ने यह संकल्प भी व्यक्त कर दिया कि समर्थक भरोसा रखें। इंतजार बस सही समय का हैै।
यह भी है बानगी
राजनीति में कभी-कभी कई बातें बोली नहीं जाती बल्कि हावभाव से जताई जाती हैं। वही मंगलवार को राजधानी में हुआ। भाजपा के शीर्ष नेता और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरे लालकृष्ण आडवाणी आ तो रहे थे अयोध्या ढांचा ध्वंस मामले में यहां सीबीआई की विशेष अदालत में हाजिर होने।
वह भी सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश के तहत जिसमें उसने सीबीआई की अर्जी पर आडवाणी सहित कई लोगों पर ढांचा ध्वंस की साजिश का मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। पर, प्रदेश सरकार में डिप्टी सीएम और भाजपा के प्र्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य उनकी अगवानी के लिए एयरपोर्ट पर पहले से ही मौजूद थे। मौर्य ने आडवाणी स्वागत किया। बाद में वह उन्हें अपने साथ लेकर वीवीआईपी गेस्ट हाउस आए। आडवाणी के साथ उनकी पुत्री प्रतिभा भी थी।
इनके भी निहितार्थ
वीवीआईपी गेस्ट हाउस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आडवाणी की अगवानी की। उन्होंने डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, ऋतंभरा, डॉ. रामविलास वेदांती व विनय कटियार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री आडवाणी को साथ लेकर गेस्ट हाउस के अंदर गए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित प्रदेश सरकार के कई अन्य मंत्री भी थे। लगभग एक घंटा मनन-मंथन करने के बाद सभी लोग बाहर निकले। मुख्यमंत्री योगी ने सबसे पहले आडवाणी को गाड़ी में बैठाया।
इसके बाद उन्होंने डॉ. जोशी और उमाभारती को गाड़ी में बैठाया। संदेश साफ कि मंदिर मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी अपनी पुरानी गोरक्षपीठ के महंत वाली भूमिका को भूले नहीं हैं। वह बिना किसी असमंजस और झिझक के इस एजेंडे पर आज भी आगे बढ़ने को तैयार हैं। बात जब भी भगवा सरोकारों की होगी तो वह पीछे रहने वाले नहीं। यह भी महज संयोग है कि मंदिर आंदोलन के दिग्गजों से गुफ्तगू के बाद मुख्यमंत्री अगले ही दिन यानी बुधवार को अयोध्या जा रहे हैं।