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वंश के चक्कर में ये बने 'राज्यपाल राज' में रोड़ा

Mon, 14 Jul 2014 10:53 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के राज्यपाल बनने में रुचि न लेने के कारण राज्यपालों की नियुक्ति का पेंच फंसा हुआ है।
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भले ही ये नेता इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोलना चाहते हों लेकिन इनके करीबी लोगों की मानें तो 70 पार कर चुके इन नेताओं की फिक्र अपने से ज्यादा उत्तराधिकारियों के समायोजन की है।

कुछ अपने स्वभाव व दिनचर्या के लिहाज से राज्यपाल जैसे पद से दूर ही रहना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश के नेताओं की बात करें तो यहां से फिलहाल तीन नेताओं को राज्यपाल बनाने की चर्चा है।
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राज्यपाल पद को लेकर नहीं हैं उत्सुक

इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह,  पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी और पूर्व मंत्री वरिष्ठ नेता लालजी टंडन शामिल हैं। यह तीनों लोग राज्यपाल बनने के लिए उत्सुक नहीं दिखते।

पर, वरिष्ठ नेता होने के नाते इस पूरे मामले पर कुछ भी बोलना नहीं चाहते। हालांकि इन नेताओं के करीबी सूत्र जो कुछ बताते हैं उससे यही साबित होता है कि ये लोग राज्यपाल बनने के इच्छुक नहीं हैं।

फिर भी पार्टी अगर फैसला ले ही लेगी तो नई भूमिका से इन्कार भी नहीं करेंगे। इनमें कल्याण सिंह और केशरीनाथ चाहते हैं कि उन्हें पार्टी अब कुछ दे या न दे परंतु उनके पुत्रों की राजनीतिक जमीन पार्टी के भीतर मजबूत हो जाए।

भाजपा टुकड़ों में राज्यपालों की नियुक्ति करना नहीं चाहती है। वह चाहती है कि जहां भी राज्यपालों की नियुक्ति होनी है, एक साथ हो जाए। यूपी के नेताओं का मामला तय हो तो आगे बात बढ़े।

अपनी-अपनी बात

कल्याण सिंह कहते हैं,‘सवाल हमारी इच्छा या अनिच्छा का नहीं है। स्वयंसेवक हूं। भाजपा के साधारण कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री पद तक सफर तय कर लिया। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है।

मुझे और क्या चाहिए। पर, अनुशासित कार्यकर्ता हूं। पार्टी जिस रूप में चाहे मेरा उपयोग कर सकती है।’ वहीं केशरीनाथ त्रिपाठी कहते हैं, ‘मुझसे अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा है।

पर, जहां तक मेरा सवाल है तो आज तक पार्टी ने ही मेरी भूमिका का फैसला किया है। इस बार भी वही फैसला करेगी। जो फैसला करेगी उसे इस बार भी मानूंगा।’
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टंडन का बोलने से इन्कार

लालजी टंडन ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। काफी मुश्किल से सिर्फ इतना कहा कि यह सब मीडिया के दिमाग की उपज है।

उनके करीबियों की मानें तो टंडन अपनी दिनचर्या, व्यक्तित्व और स्वभाव को राज्यपाल जैसी औपचारिक भूमिका के अनुकूल नहीं पा रहे हैं। वह निजी कारणों से लखनऊ से दूर भी नहीं रहना चाहते।

इस कारण वह राज्यपाल बनने के लिए अनिच्छुक हैं। बावजूद इसके पार्टी अगर उन्हें राज्यपाल बनाने का फैसला ले ही लेगी तो इन्कार भी नहीं करेंगे।
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