एक साल की मशक्कत के बाद शुक्रवार को सपा सरकार ने बसपा शासनकाल में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) के हुए कामों में गड़बड़ी की तकनीकी जांच का आदेश जारी कर दिया है।
सरकार ने पूर्व में ईओडब्ल्यू जांच को स्थगित कर जिन 101 परियोजनाओं की तकनीकी जांच का फैसला किया था, उनकी सूची तैयार कर जिलाधिकारियों को भेज दी गई है।
शासन ने जिलाधिकारियों से जांच रिपोर्ट एक महीने में देने को कहा है। जिलाधिकारी तकनीकी जांच के बाद जरूरत होने पर ईओडब्ल्यू जांच की सिफारिश कर सकेंगे।
हालांकि शासनादेश के अनुसार ईओडब्ल्यू को जांच सौंपने के पहले जिलाधिकारियों को अपराधिक कृत्य से जुड़े मामले में संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करनी होगी।
प्रमुख सचिव पंचायतीराज अशोक कुमार ने जिलाधिकारियों को जिन परियोजनाओं व निर्माण कार्यों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है, उनमें 2007-08 से 2011-12 तक के काम शामिल हैं।
उधर शासन ने अपर मुख्य अधिकारी व कार्यदायी संस्थाओं के संबंधित अधिकारियों को जांच समिति के समक्ष अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है।
ये है मामला
सपा की सरकार ने सत्ता में आने के बाद बीआरजीएफ के 22 हजार निर्माण कार्यों की ईओडब्ल्यू से जांच कराने की घोषणा की थी।
साथ ही जांच के दौरान संबंधित निर्माण कार्य और उससे जुड़े भुगतान पर रोक लगा दी थी। पर ईओडब्ल्यू जांच एजेंसी द्वारा 22 हजार कार्यों की जांच में असमर्थता जताने के बाद शासन ने ईओडब्ल्यू जांच व भुगतान पर रोक संबंधी आदेश को स्थगित कर दिया था।
साथ ही महज 101 कार्यों की तकनीकी जांच कराने का फैसला किया था। बाकी कामों की जांच डीएम अपने स्तर से कमेटियां गठित कर कराएंगे।