मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों-सीएचसी को गोद लिया है। इसमें दो गोरखपुर और एक-एक सीएचसी वाराणसी व अयोध्या की है। इसी के साथ इन सीएचसी के कायाकल्प की तैयारी शुरू हो गई है। यहां कोविड-19 की तीसरी लहर के दौरान मरीजों को भर्ती करने और इलाज के लिए जरूरी सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अयोध्या की मसौधा सीएचसी को गोद लेने की घोषणा की थी। इसके बाद गोरखपुर की चरगांवा, जंगल कौडिय़ा सीएचसी और वाराणसी की हाथीबाजार सीएचसी को गोद लिया गया है। महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि चारों आदर्श सीएचसी के रूप में विकसित की जाएंगी। यहां बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी। सभी को फस्र्ट रेफरल यूनिट के तौर पर उच्चीकृत किया जाएगा।
एक सीएचसी में 30 बेड पर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था होती है। लैब, एक्स-रे जांच आदि की सुविधा भी दी जाती है। अब इसे उच्चीकृत करके पैथोलॉजी जांच के लिए विशेष लैब, डिजिटल एक्स-रे मशीन लगाई जाएगी। कर्मचारियों और चिकित्सक की कमियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी जगह से उपलब्ध स्टाफ की जानकारी ली गई है। सभी सीएचसी के पचास प्रतिशत बेड भविष्य को देखते हुए कोविड मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इनमें से ही कुछ बेड को लेवल-टू स्तर के अस्पतालों की तरह इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरी लहर में बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए, उनके इलाज की व्यवस्था भी की जाएगी।
मानव संसाधन की कमी पूरी करना चुनौती
एक सीएचसी पर पांच डॉक्टरों की तैनाती का मानक है। इसमें एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, एक फिजीशियन और एक अन्य किसी विधा का डॉक्टर रखा जाता है। लेकिन अधिकतर सीएचसी पर एनेस्थेटिस्ट नहीं हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट के वहां सिर्फ दो पद हैं। 24 घंटे सीएचसी पर सेवाएं देने के लिए कम से कम तीन फार्मासिस्ट चाहिए होंगे। स्टाफ नर्स के भी सीएचसी पर तीन पद हैं। सीएचसी को उच्चीकृत करने पर नर्स के पद भी बढ़ाने होंगे।