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UP News: औद्योगिक क्षेत्र बना टीबी का हॉटस्पॉट, प्रदूषण बड़ी वजह; हरियाली वाले क्षेत्रों में मामले कम

Mon, 03 Aug 2026 09:05 AM IST
Bhupendra Singh सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

राजधानी में औद्योगिक क्षेत्र टीबी का हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। इसके पीछे प्रदूषण बड़ी वजह है। लखनऊ के 93 टीबी उपचार केंद्रों में औद्योगिक क्षेत्र तालकटोरा से सटा आरएलबी अस्पताल केस के मामले में दूसरे स्थान पर है। घनी आबादी और ज्यादा जनसंख्या के चलते टीबी अस्पताल ठाकुरगंज शीर्ष पर है। वहीं, हरियाली वाले क्षेत्रों में टीबी के मामले कम हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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टीबी (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ का तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) का हॉटस्पॉट बन गया है। क्षेत्र से सटे रानी लक्ष्मी बाई (आरएलबी) संयुक्त चिकित्सालय के टीबी उपचार केंद्र पर जनवरी से जुलाई के बीच 391 मरीज पंजीकृत हुए। लखनऊ के 93 टीबी उपचार केंद्रों में यह दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।
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टीबी संक्रामक बीमारी है। घनी आबादी में इसका प्रसार तेजी से होता है। पुराने लखनऊ की आबादी बेहद घनी है। इसी वजह से टीबी के मरीज भी यहां सबसे ज्यादा हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख टीबी उपचार केंद्र टीबी अस्पताल ठाकुरगंज में छह महीने में सबसे ज्यादा 486 मरीज पंजीकृत हुए। घनी आबादी के साथ ही प्रदूषण टीबी का एक प्रमुख कारण है। तालकटोरा और इससे सटे राजाजीपुरम इलाकों में जनसंख्या घनत्व भले कम हो, लेकिन प्रदूषण की वजह से यहां टीबी के मरीज तेजी से बढ़े हैं।

 

हरियाली वाले क्षेत्रों में मामले कम

राजधानी में माल, मलिहाबाद और काकोरी विकास खंड फल पट्टी क्षेत्र में भी आते हैं। इसके चलते यहां शहरीकरण अन्य ब्लॉक के मुकाबले कम है। यहां हरियाली की स्थिति अन्य क्षेत्रों से बेहतर है। इसका प्रभाव टीबी के मामलों पर भी दिखाई पड़ता है। अन्य विकास खंडों में टीबी के औसत मामले तीन से साढ़े तीन सौ तक हैं। वहीं, इन तीनों क्षेत्रों में मरीजों की औसत संख्या ढाई सौ के करीब ही है।

घर के करीब है दवाएं देने की व्यवस्था

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी की दवाएं घर से निकटतम टीबी उपचार केंद्र पर निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे रोगी को दवाएं लेने में सुविधा होने के साथ ही क्षेत्रवार टीबी के प्रकोप का अनुमान लगाना भी आसान होता है।

सामान्य से दोगुना रहता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

राजधानी में तालकटोरा सबसे प्रदूषित क्षेत्र है। आदर्श वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 से नीचे रहना चाहिए, लेकिन यहां औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक सौ के करीब रहता है। सर्दियों में तो यह 350 का आंकड़ा पार कर जाता है।
 
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टीबी के प्रसार में प्रदूषण बड़ी वजह

प्रदूषण और घनी आबादी की वजह से बीमारी तेजी से फैलती है। प्रदूषण के कारण ही देश भर में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज दिल्ली में हैं। तालकटोरा क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता खराब है। वहीं, पुराने लखनऊ में आबादी बेहद घनी है। इन वजह से यहां टीबी के मामले ज्यादा हैं। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत काफी अच्छा काम हो रहा है। इन क्षेत्रों में स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है। इसी वजह से टीबी रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। -प्रो. सूर्यकांत, चेयरमैन, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, नॉर्थ जोन टास्क फोर्स

टीबी मरीजों के मामले में राजधानी के शीर्ष केंद्र

केंद्र सामान्य टीबी दवा प्रतिरोधी टीबी
टीबी अस्पताल ठाकुरगंज 486 29
आरएलबी अस्पताल 391 23
लोहिया संस्थान 366 12
केजीएमयू 302 23
भाऊराव देवरस अस्पताल 266 20
कैंट जनरल अस्पताल 263 17


टीबी से बचाव के लिए ये करें

मास्क पहनें, पौष्टिक भोजन करें और इम्यूनिटी मजबूत रखें, प्रदूषण वाले क्षेत्र में जाने से बचें, दो सप्ताह से ज्यादा खांसी और बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह लें।
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