इंदिरा आवास के लिए लोगों को किस-किस तरह के पापड़ बेलने पड़ते थे, कई मौकों पर इसका खुलासा हो चुका है।
मगर अब अफसरों को गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों को ढूंढ़-ढूंढ़ कर इंदिरा आवास देने होंगे। शासन ने सूबे के मुख्य विकास अधिकारियों को इस संबंध में फरमान सुना दिया है।
पिछले दिनों संभल, गाजियाबाद, गोंडा, सुल्तानपुर, मऊ, हमीरपुर, झांसी, बिजनौर, मिर्जापुर, सोनभद्र, रामपुर, बांदा, चंदौली, सीतापुर के अधिकारियों ने शासन को बताया था कि इंदिरा आवास के लिए जो स्थायी पात्रता सूची बनाई गई थी, उससे पात्र लाभार्थी नहीं मिल पा रहे हैं।
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कई जिलों ने अनुसूचित जाति व जनजाति के लाभार्थी न मिलने की रिपोर्ट दी थी। इसकी वजह से लक्ष्य के अनुसार आवासों का आवंटन न होने की बात कही गई थी।
शासन ने जिलों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के अधिकारियों से इस संदर्भ में बात की थी। इसके बाद बीच का रास्ता निकाल लिया गया है।
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प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अरुण सिंघल ने बताया कि कई जिलों से पात्रता सूची से लाभार्थी न मिलने की बात सामने आई है। इस संबंध में केंद्र के अधिकारियों से बात की गई है।
अब जिले के अधिकारियों को यह अधिकार दिया जा रहा है कि यदि स्थायी पात्रता सूची से लाभार्थी नहीं मिल पा रहे हैं तो बीपीएल लिस्ट में शामिल लेकिन स्थायी सूची में शामिल होने से छूटे लाभार्थियों का पता कर आवास देने की कार्यवाही करें।
प्रमुख सचिव ने बताया कि ऐसे लाभार्थियों का चयन तेजी से करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लक्ष्य पूर्ति की कार्यवाही समय से हो सके।
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