लखनऊ में निशातगंज के उमराव हाता निवासी सलमा के एकलौते बेटे 22 वर्षीय शफीक की अबूधाबी में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। वह 24 मई को नौकरी के लिए अबूधाबी गया था। बृहस्पतिवार सुबह सलमा को फोन कर हादसे में शफीक की मौत की जानकारी दी गई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह बेटे का शव देश की मिट्टी में ही दफनाना चाहती हैं लेकिन उनके पास पैसा है न ही उन्हें सिस्टम की जानकारी है। ऐसे में दर-दर भटक रही सलमा ने मदद की अपील की है। सलमा ने बताया उसका भरा पूरा परिवार था। पति रशीद सब्जी बेचते थे।
पांच साल पहले उनका इंतकाल हो गया। बेटी का निकाह हो चुका है। सिर्फ एक बेटा शफीक था जिससे बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी और सुकून की उम्मीदें थीं। शफीक के कुछ परिचित अरब देशों में नौकरी करते हैं।
उसने भी वहां जाकर नौकरी करने और मां के लिए खुशियां बटोरने की जिद पकड़ ली। अबूधाबी में एक मोटर वर्कशॉप में काम करने वाले फैजाबाद के शुजागंज खरपीपरा गांव निवासी तहजीब व मवई के गेसूपुर के आसिफ से संपर्क किया।
बीते महीने दोनों लखनऊ आए और हर महीने 1400 रियाल (भारतीय मुद्रा के मुताबिक करीब 23000 रुपये) की नौकरी पक्की करके किसी शाजित अली की मदद से उसका पासपोर्ट व वीजा बनवाया। बकौल सलमा, बेटे की नौकरी के लिए उन्होंने अपने परिचितों से 70000 रुपये उधार लिए थे।
24 मई को शफीक लखनऊ से हवाई जहाज से चला गया। अबूधाबी पहुंचकर उसने फोन पर बातचीत की और हालचाल ठीक बताया। उसने बताया कि वर्कशॉप में एलाइनमेंट और व्हील बैलेंसिंग का काम दिया गया है।