लखनऊ। अवैध मानव प्रवास को लेकर भारत सरकार चिंतित है। देश में केरल और पंजाब से जबकि प्रदेश में गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर से कई लोग खाड़ी देशों में और पश्चिमी देशों में प्रवास करते हैं। अवैध प्रवास न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि प्रवासियों के लिए कई समस्याएं भी खड़ी करता है। जनवरी 2025 से अब तक अवैध रूप से अमरीका में रह रहे 388 से अधिक भारतीयों को वापस देश भेजा गया है, जो चिंता का विषय है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के इमिग्रेशन आफिसर मुकेश कुमार ने महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (डब्लूसीएसओ) की कार्यशाला में शुक्रवार को दी।
डब्लूसीएसओ ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस स्टेशनों (एएचटीयू) की क्षमता बढ़ाने के लिए अवध शिल्प ग्राम में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है। कार्यशाला में सभी जिलों से पुलिस अधिकारियों के अलावा भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सात जिलों के एसएसबी और चाइल्ड हेल्पलाइन प्रतिनिधियों सहित 250 से अधिक लोग मौजूद रहे।
डब्लूसीएसओ की एसपी वृंदा शुक्ला ने कहा कि मानव तस्करी से जुड़े हर मामले में ठोस विधिक कार्यवाही के बिना, इस अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना संभव नहीं है। एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि प्रदेश में 2020 से एएचटीयू के सुदृढ़ीकरण और विस्तारीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। सभी 75 जिलों में एएचटीयू को स्वतंत्र पुलिस थानों का दर्जा दिया गया है और उन्हें आवश्यक संसाधन तथा जनशक्ति प्रदान की गई है।
कार्यशाला में आरएमएनएलयू के प्रो. केए पांडेय ने लीगल फ्रेम वर्क सराउडिंग ह्यूमन ट्रैफिकिंग, ब्रिटिश एक्शन ट्रस्ट इंडिया की पूजा कांडूला और यूनीसेफ से महर्षि अग्निहोत्री ने विक्टिम सपोर्ट एंड रिहैबिलिटेशन स्ट्रेटजी विषय पर चर्चा की। कार्यक्रम में डब्लूसीएसओ की एडीजी पद्मजा चौहान, डीआईजी किरण यादव, एसपी वृंदा शुक्ला, एडिशनल एसपी विजय त्रिपाठी, डिप्टी एसपी विनोद यादव और हितेंद्र कृष्ण समेत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।