आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
लखनऊ। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) ने मंगलवार को 61वां स्थापना दिवस मनाया। मुख्य वक्ता व डीआरडीओ के पूर्व निदेशक और एमिटी यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ के कुलपति डॉ. डब्ल्यू. सेल्वमूर्ति ने कहा कि भारत आज नवाचार के स्वर्ण युग में है। यदि हम हरित ऊर्जा, जैव-औषधि, स्वदेशी तकनीक व अर्थव्यवस्था में उत्कृष्टता हासिल करें तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है। प्रो. एसएच जैदी स्मृति व्याख्यान के तहत बोलते हुए डॉ. सेल्वमूर्ति ने कहा कि प्रयोगशालाओं में किया गया शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ आम जनता तक पहुंचे। कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने ऑनलाइन संवाद किया। मुख्य अतिथि एल. वेंकटेश्वरलु ने भी आईआईटीआर के योगदान की सराहना की।
मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा में मुस्तैद है आईआईटीआर
राजधानी स्थित भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अधीन एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है। यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कार्य करता है। संस्थान रसायनों, प्रदूषकों, औद्योगिक अपशिष्टों, खाद्य पदार्थों और दवाओं के शरीर तथा पर्यावरण पर प्रभावों का अध्ययन करता है। यहां विषविज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा शोध किया जाता है।
आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
आईआईटीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।