राज्य कर्मचारी अधिकार मंच शनिवार को बैठक कर तय करेगा कि हड़ताल के दौरान कब और किस तरह से आकस्मिक सेवाओं को बंद किया जाए।
आकस्मिक सेवाएं चरणबद्ध तरीके से बंद की जाएंगी। अधिकार मंच के महासचिव शिवबरन सिंह यादव ने बताया कि 15 नवंबर के बाद से रोडवेज व अस्पताल जैसी आवश्यक सेवाएं भी हड़ताल में शमिल करने की योजना थी।
इसी के तहत 16 नवंबर को पहले अधिकार मंच के नेताओं की बैठक होगी। इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
मंच के प्रवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रोडवेज के ड्राइवर व क्लीनर सहित कई लोग हड़ताल में आने के लिए तैयार हैं।
कई संगठनों का समर्थनराजस्व निरीक्षक संघ ने भी गुरुवार को बेमियादी हड़ताल के समर्थन का ऐलान किया। संघ के अध्यक्ष त्रिभुवन नाथ दीक्षित ने कहा कि तीसरे दिन उन लोगों ने भी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय किया है।
उधर, समाज कल्याण विकास संघ और उत्तर प्रदेश सिंचाई कार्मिक महासंघ ने भी हड़ताल का समर्थन किया है।जल निगम का डिप्लोमा इंजीनियर्स संगठन भी हड़ताल पर है।
महामंत्री आरपी गुप्ता ने कहा कि सरकार ने यदि मांगें नहीं मानी तो वे ग्रामीण पेयजल योजना से संचालित हो रही पेयजल व्यवस्था ठप कर देंगे।
सिंचाई संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार चौधरी व महामंत्री शिशुपाल सिंह ने कहा कि उनके संगठन में आने वाले सींचपाल, नलकूप चालक व सींच पर्यवेक्षक पूरी तरह से हड़ताल में शामिल हैं।