लखनऊ। तनाव भरे जीवन और अपने काम से संतुलन बनाने के लिए समय निकालकर हमें जंगलों की ओर लौटना होगा। जंगलों में पर्यटन के जरिये प्रकृति की गोद में जाकर हमारी ज्ञानेंद्रियां और चैतन्य होती हैं। ये बातें मंगलवार को सुशांत गोल्फ सिटी में एक निजी होटल में जयबृज जीआरके फाउंडेशन की ओर से वन पर्यावरण और पर्यटन पर हुए सेमिनार में उप्र पर्यटन विभाग के महानिदेशक व प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आज यूपी में पर्यटन के अनेक अवसर उपलब्ध हैं, जिसका लाभ युवा पीढ़ी व व्यवसायी ले सकते हैं। जहां भी पर्यटन को बढ़ावा मिलता है वहां चतुर्दिक विकास होता है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ ही साथ अन्य लोगों को भी व्यापार का अवसर मिलता है। हाल में ही संपन्न महाकुंभ इसका शानदार उदाहरण है।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रमुख वन संरक्षक व उप्र वन निगम के प्रबंध निदेशक केके सिंह ने कहा कि प्रदेश में वन व पर्यावरण के बीच ईको टूरिज्म के तमाम पर्यटन स्थल हैं, जहां जाकर लोग प्राकृतिक वास का आनंद ले रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व, कतर्निया घाट टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, रानीपुर टाइगर रिजर्व में ईको टूरिज्म कार्य प्रगति पर है।
जयबृज जीआरके फाउंडेशन के अध्यक्ष कुमार केशव ने कहा कि प्रदेश में इस समय पर्यटन में व्यवसाय के लिए अच्छा माहौल है। कार्यक्रम में उप्र के पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक मनोज कुमार, उप्र वन निगम के उप प्रबंध निदेशक संजय कुमार, पर्यटन के निदेशक प्रखर मिश्रा, आकाशवाणी के उप निदेशक अजीत कुमार चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया।
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घर जैसी सुविधाओं वाले ''''''''मोटर होम'''''''' का किया अनावरण
इस मौके पर उप्र वन निगम और उप्र पर्यटन विभाग ने साथ मिलकर एक ''''''''मोटर होम'''''''' का अनावरण किया। मोटर होम अंदर से बिस्तर, किचन, वॉशरूम, घर जैसी सुविधाओं से लैस है। वन व आसपास के क्षेत्रों में पक्का निर्माण की अनुमति नहीं है, ऐसे में ''''''''मोटर होम'''''''' के जरिये प्रदेश के जंगलों व टाइगर रिजर्व आदि क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से प्राकृतिक वास कर सकते हैं। मोटर होम ईको टूरिज्म की दिशा में एक अच्छी पहल साबित हो सकती है।