लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में आंबेडकर जयंती और स्थापना दिवस के चार दिवसीय समारोह के तहत दूसरे दिन रविवार को ''समावेशी विकास'' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। शिक्षाविदों ने डॉ. आंबेडकर के विचारों को आज के भारत के लिए मार्गदर्शक बताया। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विकसित भारत के लिए समावेशी विकास जरूरी है। समाज को डाॅ. आंबेडकर के आदर्शों पर समानता, समरसता और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ाना होगा। मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री प्रो. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि सतत विकास तभी संभव है जब विकास का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे।
विशिष्ट अतिथि राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय अलीगढ़ के पूर्व कुलपति प्रो. चंद्रशेखर ने शिक्षा को सबसे बड़ा साधन बताया। प्रो. एसके चहल ने कहा कि सामाजिक न्याय और समान अवसर के बिना वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। बीबीएयू के प्रो. राज शरण शाही ने आंबेडकर के सामाजिक उत्थान के प्रयासों को रेखांकित किया, जबकि बीबीएयू की विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा ने उनके नारे -शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो को आज भी प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में पोस्टर, वाद-विवाद, क्विज और रंगोली प्रतियोगिताएं हुईं। साथ ही प्रदर्शनी में ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प और लोक कला की आकर्षक झलक देखने को मिली।
समारोह में मौजूद अतिथिगण।
समारोह में मौजूद अतिथिगण।