वित्त वर्ष 2022-23 में प्रदेश को आर्थिक मोर्चे पर कई नई चुनौतियों का सामना करने की स्थिति बन रही है। सीधे तौर पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति में कमी का अनुमान है। वहीं, नए बजट में नकद खर्च वाली कई योजनाओं पर व्यय भार बढ़ना है और कई नई योजनाएं शुरू होनी हैं। ऐसे में राजस्व प्राप्तियों में कमी और खर्च में वृद्धि का असर सीधे तौर पर पूंजीगत कार्यों पर पड़ने की आशंका है। पूंजीगत कार्यों में सड़क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो जैसे विकास से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आते हैं।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में राज्य के सामने राजस्व संग्रह से होने वाली आय को लेकर दो बड़ी चुनौतियों को चिह्नित किया है। पहला, जीएसटी से होने वाली आय में कमी के एवज में केंद्र से होने वाली क्षतिपूर्ति जून के बाद बंद हो जाएगी। राज्य कर विभाग ने अनुमान लगाया है कि इससे राजस्व में वार्षिक 30 हजार करोड़ रुपये तक कमी आने का अनुमान है। इसके अलावा राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों पर लोगों की नाराजगी थामने के लिए पेट्रोल व डीजल पर वैट की दरों में कटौती की थी। राजस्व प्राप्तियों में इससे हर महीने करीब 465 करोड़ रुपये की कमी हो रही है। इस तरह पूरे वित्त वर्ष में करीब 5580 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है।
सत्ताधारी दल ने लाभार्थी समूह को साधने से जुड़े कई ऐसे नए एलान किए हैं, जिनके क्रियान्वयन पर हजारों करोड़ का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। इनमें निराश्रित महिला, वृद्धावस्था व दिव्यांगों की पेंशन तथा कन्या सुमंगला योजना की लाभार्थियों को दी जाने वाली राशि में वृद्धि की जानी है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वर्ष में दो एलपीजी सिलेंडर देने का वादा है। जानकार बताते हैं कि राजस्व प्राप्तियों में कमी व नए वित्त वर्ष से ही नकद खर्च में वृद्धि से जुड़ी कई नई योजनाओं की शुरुआत का दबाव नए बजट पर साफ नजर आएगा।
इस तरह समझें अतिरिक्त बजट की जरूरत
- प्रदेश में 15 लाख निराश्रित महिलाओं को पेंशन मिल रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही में यह पेंशन 500 रुपये प्रतिमाह थी। चुनाव के ठीक पहले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में इसे बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इस तरह इस पेंशन पर पूरे वित्त वर्ष में 2292.77 करोड़ रुपये का खर्च आया है। लेकिन, चुनाव संकल्प पत्र में वादा किया गया है कि निराश्रित महिलाओं की पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह की जाएगी। नए वित्त वर्ष से ही यदि इस वादे पर अमल होता है तो पूरे वित्त वर्ष के लिए करीब 5,580 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
- वृद्धावस्था से जुड़े 56 लाख लाभार्थियों की पेंशन भी 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने का वादा है। इस स्कीम में चालू वित्त वर्ष में करीब 4,200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वादे पर अमल से करीब 10,080 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसी तरह 11.19 लाख दिव्यांगों की पेंशन भी 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 करने का वादा है।
- उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को होली व दीवाली पर एलपीजी सिलेंडर देने का वादा है। प्रदेश की 1.67 करोड़ लाभार्थियों से यह वादा पूरा करने पर 3300 करोड़ रुपये का नया खर्च बढ़ेगा।
- कन्या सुमंगला योजना की 10.01 लाख लाभार्थियों को 15 हजार की जगह अब 25 हजार रुपये वित्तीय सहायता दिया जाना है। चालू वित्त वर्ष में इसके लिए 1200 करोड़ का प्रावधान किया गया था। अब इस वादे पर अमल के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है।
- किसानों को सिंचाई की मुफ्त बिजली, कॉलेज जाने वाली मेधावी बेटियों को स्कूटी, दो करोड़ युवाओं को टैबलेट या स्मार्टफोन तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा पर आने वाले खर्च का भी आकलन हो रहा है।
विकास प्रोजेक्ट पर पहले से ही खर्च में कमी
कोविड महामारी से पूंजीगत खर्च में पहले से ही कमी आई है। 2020-21 में अवस्थापना सुविधाओं व आधारभूत सेवाओं के विकास पर 52237.11 करोड़ खर्च हुए थे। 2021-22 के बजट प्रस्ताव में पूंजीगत खर्च के लिए 113767.70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। लेकिन, प्रावधान के अनुसार बजट की उपलब्धता न होने पर पुनरीक्षित अनुमान में 17287.07 करोड़ की कटौती कर 96480.63 करोड़ कर दिया गया।
वित्त वर्ष 2022-23 के लेखानुदान से देखें तो आगामी वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च इससे भी कम होने का अनुमान है। सरकार ने 2022-23 में पूंजीगत मद में 95793.69 करोड़ रुपये ही खर्च का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्त वर्ष से वृद्धि की जगह कम है। राजस्व प्राप्तियों व खर्च को लेकर बन रहे नए परिदृश्य में इसका असर आगे की विकास योजनाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।