लखनऊ। रहीमाबाद क्षेत्र में हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण फैलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग समाधान निकालने के बजाय मामले पर पर्दा डालने में जुटा है। आलम यह है कि केजीएमयू की जांच में चार मरीजों के संक्रमित मिलने के बावजूद विभाग ने उनके परिजनों या संपर्क में आए लोगों की अनिवार्य स्क्रीनिंग शुरू नहीं की है। इससे बीमारी के और अधिक फैलने की आशंका पैदा हो गई है।
24 फरवरी को रहीमाबाद में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में 19 लोगों ने खून दिया था। बलरामपुर अस्पताल और लोहिया संस्थान में हुई आईडी-नैट तकनीक की जांच में इन सभी के नमूनों में संक्रमण के संकेत मिले। इसके बाद स्वास्थ्य महानिदेशालय के निर्देश पर केजीएमयू में दोबारा जांच कराई गई, जिसमें चार मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसे मरीजों के परिवार के हर सदस्य की गहन जांच होनी चाहिए, जो अब तक नहीं हुई।
रैपिड जांच की खानापूर्ति पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग केवल आंकड़ों को छिपाने के लिए रैपिड टेस्ट का सहारा ले रहा है। हाल ही में 54 लोगों की रैपिड जांच कर उन्हें निगेटिव घोषित कर दिया गया, जबकि विशेषज्ञ स्वयं मानते हैं कि हेपेटाइटिस-बी की शुरुआती अवस्था में रैपिड टेस्ट पूरी तरह विश्वसनीय नहीं होता। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि संक्रमित मरीजों के परिजनों की जल्द जांच कराई जाएगी।