लखनऊ। माटीकला महोत्सव में बृहस्पतिवार को हुनर और रचनात्मकता के रंग देखने को मिले। मिट्टी की खूबसूरत कलाकृतियां तैयार करने से लेकर धागों के सहारे आकर्षक उत्पाद और टेराकोटा के फव्वारों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। गोरखपुर से आए कारीगर राममिलन प्रजापति ने माटीकला महोत्सव में अपना स्टॉल लगाया है, जिसमें टेराकोटा के बने फव्वारों से लेकर हाथी, बर्तन, खिलौने और घर की सजावट के तमाम सामान उपलब्ध हैं। राममिलन का कहना है कि हमारे जैसे लोग जो मार्केटिंग नहीं जानते हैं वह इस महोत्सव के जरिये अपने हुनर को दुनिया के सामने रख पा रहे हैं। राममिलन ने बताया कि उनके पास 50 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक के उत्पाद हैं और लोगों को टेराकोटा के बने सामान खासा पसंद आ रहे हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।
धागों से बने उत्पादों की भी मांग-
लखनऊ की गौरी सिंह ने महोत्सव में क्रोशिया के बने उत्पादों का स्टॉल लगाया है। गौरी ने बताया कि उनकी मां क्रोशिया के बने बैग बनाती हैं। हालांकि पहले उन्हें क्रोशिया चलाना नहीं आता था लेकिन पांच-छह साल पहले उन्होंने क्रोशिया चलाना सीखा और अब उनके उत्पाद महिलाओं को बेहद पसंद आ रहे हैं। इन बैग की कीमत करीब 1500-2000 रुपए तक है।
सुनहरी थीम पर सजाई दुकान-
लखनऊ में रहने वाले मुकेश ने माटीकला महोत्सव में सुनहरी थीम पर दुकान सजाई है। इसमें दीयों से लेकर रामदरबार तक सभी सामान सुनहरी थीम पर तैयार किए गए हैं। इस थीम को लेकर मुकेश का कहना है कि आज जब सोने चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं तब इनका सुनहरा प्रकाश लोगों के घरों को एक अलग ही चमक देगा। मिट्टी, एल्युमीनियम और फाइबर के बने राम दरबार मुकेश के स्टॉल का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
माटीकला महोत्सव में खरीदारी करते लोग
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