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Lucknow News: आठ माह में प्रधान सहायक से बना दिया प्रशासनिक अधिकारी

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केजीएमयू।
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लखनऊ। केजीएमयू में एड हॉक नियुक्तियों और नियम विरुद्ध पदोन्नति के मामले में जांच शुरू हो गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव कृतिका शर्मा की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक में पदोन्नति प्रक्रिया में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि केजीएमयू प्रशासन ने महज आठ माह की सेवा में ही एक कर्मचारी को प्रधान सहायक से प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नत कर दिया। कमेटी ने कुलसचिव से सवाल किया है कि क्या इस पद के लिए कोई न्यूनतम सेवा अवधि निर्धारित है या नहीं?
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एड हॉक कार्मिक सैय्यद अख्तर अब्बास व अन्य को नियम विरुद्ध लाभ देने का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय और विधान परिषद में गूंजा था। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई, जिसमें वित्त नियंत्रक शिवेंद्र मिश्र और संयुक्त सचिव भी शामिल हैं।

जांच कमेटी ने कुलसचिव को पत्र भेजकर तदर्थ (एड हॉक) कार्मिकों के स्थायीकरण और विनियमितीकरण का आधार, बैकडेट से किए गए स्थायीकरण के नियम, वरिष्ठता सूची को लेकर गठित पिछली पांच और छह सदस्यीय कमेटियों की रिपोर्ट, नियम विरुद्ध सेवा लाभ पाने वाले सभी कार्मिकों की सूची आदि मांगी है। कमेटी की अगली बैठक 16 मार्च को होगी, जिसमें केजीएमयू के कुलसचिव को रिकॉर्ड के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी ने पारदर्शिता के लिए केजीएमयू के ही एक सदस्य को जांच दल में शामिल करने की संस्तुति भी की है।
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वायरिंग और केबलिंग में भ्रष्टाचार का आरोप

लखनऊ। केजीएमयू पर विद्युत/यांत्रिक विभाग में वर्टिकल निविदा के अधीनस्थ होने वाली वायरिंग/केबलिंग में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। गोमतीनगर निवासी केपी सिंह ने अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष से शिकायत की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वायरिंग एवं केबलिंग के कार्यों में खराब गुणवत्ता के साथ-साथ माप पुस्तिका में कार्य के सापेक्ष अधिक माप करके माप पुस्तिका (एमबी) में अंकित किया जाता है। ठेकेदारों से सांठगांठ करके एक कार्य का कई बार भुगतान कराया गया है। कई विभागों में करीब चार साल में तीन बार वायरिंग का भुगतान हुआ है। आरोप तो यह भी है कि लोक निर्माण विभाग से संबद्ध किए गए अवर अभियंता अपने परिवार एवं कई रिश्तेदारों को अलग तरीके से आउटसोर्सिंग में कार्य ले रहे हैं। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि शिकायती पत्र की जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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