लखनऊ। तेजी से बदलती दुनिया में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करना चाहिए। ये बातें दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बृहस्पतिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव में युवाओं को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत, कौशल विकास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना युवाओं को देश के विकास में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार करती है। एआई को लेकर उन्होने विद्यार्थियों को तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने और अपनी सोच व निर्णय क्षमता को बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग समाज तथा राष्ट्र की प्रगति में करने का आह्वान किया। इस दौरान राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की ओर से प्रकाशित तीन पुस्तकों तमिल कहानियां, हरि सिंह नलवा और वीह विस्वे का अनावरण किया गया।
किशोर साहित्य और वित्तीय जागरूकता पर चर्चा-
महोत्सव के सत्र किशोर मन और साहित्य- नए पाठकों की नई दुनिया में डॉ. अमिता दुबे, डॉ. कुमकुम शर्मा और प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने किशोरों की बदलती पाठकीय रुचियों और उनके अनुरूप साहित्य सृजन पर विचार साझा किए। वित्तीय जागरूकता सत्र युवाओं को निवेश से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को पैसा देने से पहले उसके अधिकृत होने की जांच की सलाह दी गई।
गजल और संगीत से सजी शाम-
सांस्कृतिक संध्या में गजल गायक मिथिलेश लखनवी ने श्रोताओं की फरमाइश पर गजलें प्रस्तुत कीं। चौदहवीं का चांद और दमादम मस्त कलंदर जैसी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा। उनके साथ तबले पर रत्नेश मिश्रा, गिटार पर राकेश आर्या, कीबोर्ड पर रिंकू राज और ऑक्टोपैड पर विकास कुमार ने संगत दी। वहीं पॉप आर्टिस्ट नैना लायल ने अपनी प्रस्तुति से माहौल में नई ऊर्जा भर दी।
लविवि में पुस्तक मेले में किताबें देखते लोग
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