विश्व में करीब ढाई अरब लोग दृष्टि दोष की समस्या से पीड़ित हैं। इसमें 55 करोड़ लोग भारत में हैं। स्कूल जाने वाले 41 फीसदी बच्चों की पढ़ाई आंखें कमजोर होने से प्रभावित हो रही है। दृष्टि दोष से पीड़ित लोगों का समय पर सही इलाज हो और उन्हें चश्मा दिया जाए तो आंखों की रोशनी को और खराब होने से बचाया जा सकता है।
आंखें सुरक्षित रहेंगी तो समाज के साथ देश-प्रदेश और व्यक्ति का विकास संभव है। आंखों की रोशनी खराब होने से देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है। आंखों की रोशनी व्यक्ति के साथ देश के विकास से जुड़ी है। इसके खराब होने से आदमी काम करने में असमर्थ रहता है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने के साथ ही देश के विकास पर पड़ रहा है।
ये निष्कर्ष अमेरिका के विजन इम्पैक्ट इंस्टीट्यूट और एरिसॉल की ओर से ‘अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर’ विषय पर किए गए शोध में सामने आए हैं। बुधवार को ‘इंप्रूविंग लाइव्स बाई इंप्रूविंग साइट विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी विजन इम्पैक्ट इंस्टीट्यूट की एडवोकेसी इन इंडिया की प्रिसिंपल कंसल्टेंट शैलजा पठानिया ने दी।
उन्होंने बताया कि देश में स्कूल जाने वाले 41 फीसदी स्कूली बच्चों की आंखें कमजोर हैं। किसी को दूर तो किसी की पास की रोशनी कमजोर है। आंखें कमजोर रहने से सिरदर्द, पढ़ाई में मन न लगना, पढ़ने व लिखने में दिक्कत जैसी समस्याएं होती हैं।
इससे बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। अभिभावक उनकी इस परेशानी को समय पर समझ लें और आई स्पेशलिस्ट की सलाह लें तो उनका जीवन बिगड़ने से बचाया जा सकता है। आंखों में दिक्कत का इलाज केवल ऑपरेशन नहीं है।